Home उत्तराखंड “ईमानदार और साफ-सुथरी छवि” वाले नेता थे मेजर खंडूरी

“ईमानदार और साफ-सुथरी छवि” वाले नेता थे मेजर खंडूरी

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उत्तराखंड ने आज एक बड़ा नेता खो दिया। पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी का मंगलवार 19 मई 2026 को देहरादून के मैक्स अस्पताल में निधन हो गया। वे 91 वर्ष के थे। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने सुबह करीब 11:10-11:15 बजे अंतिम सांस ली। मौत का कारण हार्ट अटैक बताया जा रहा है। वे लंबे समय से बीमार थे और पिछले एक महीने से अस्पताल में भर्ती थे। कुछ दिन पहले उन्हें वेंटिलेटर से हटाकर आईसीयू ऑब्जर्वेशन में रखा गया था, लेकिन हालत नहीं सुधरी। उनके बेटे मनीष खंडूरी और बेटी ऋतु भूषण खंडूरी, जो उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष हैं, ने निधन की पुष्टि की।

सेना से राजनीति तक का सफर

पौड़ी गढ़वाल के रहने वाले बीसी खंडूरी ने 35 साल तक भारतीय सेना में सेवा दी और मेजर जनरल के पद से रिटायर हुए। उनका जन्म 1 अक्टूबर 1934 को हुआ था।

सेना से रिटायरमेंट के बाद भाजपा जॉइन की। गढ़वाल से कई बार सांसद रहे। अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में 1999 में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री बने। देश में हाईवे नेटवर्क मजबूत करने में उनका बड़ा योगदान माना जाता है।

8 मार्च 2007 से 23 जून 2009 और फिर 11 सितंबर 2011 से 13 मार्च 2012 तक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री रहे। उनके कार्यकाल को अनुशासन, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख के लिए याद किया जाता है। “खंडूरी है जरूरी” का नारा उसी छवि को दिखाता था।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शोक जताते हुए कहा कि खंडूरी जी ने सेना से लेकर सार्वजनिक जीवन तक राष्ट्रहित और जनसेवा का उदाहरण पेश किया। उन्होंने सुशासन, पारदर्शिता और ईमानदार कार्यशैली की मजबूत पहचान बनाई। उनका निधन राज्य और राष्ट्रीय राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया गया। पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए देहरादून के बसंत विहार स्थित उनके आवास पर लाया जा रहा है। बीसी खंडूरी को “ईमानदार और साफ-सुथरी छवि” वाले नेता के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने सेना का अनुशासन राजनीति में भी लागू किया।