Home उत्तराखंड जनता पूछ रही सवाल, स्थायी राजधानी कब बनेगी सरकार

जनता पूछ रही सवाल, स्थायी राजधानी कब बनेगी सरकार

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राज्य को बने 26 साल पूरे हो गए, लेकिन उत्तराखंड आज भी अपनी स्थायी राजधानी के इंतजार में है। 26 वर्षों में यह राज्य कई अनुभवों से गुज़रा इस अंतराल में राज्य ने भ्रष्टाचार देखा, बेरोजगारी देखी, शिक्षा और स्वास्थ्य के बिगड़ते हालात देखे, पलायन देखा, दल-बदलू नेताओं की राजनीति देखी, घोषणाएं सुनी, शिलान्यास देखे, लेकिन राजधानी के नाम पर अभी तक सिर्फ राजनीति और बहस ही हुई है।
1994 में उमा शंकर कौशिक की अध्यक्षता वाली समिति ने गैरसैंण (चंद्रनगर) को उत्तराखंड की स्थायी राजधानी बनाने की जोरदार सिफारिश की थी। समिति ने इसे गढ़वाल-कुमाऊं के बीच रणनीतिक केंद्र और पूरे पहाड़ी राज्य के संतुलन के लिए उपयुक्त माना। समिति ने कहा था कि गैरसैंण राज्य के आठ पहाड़ी जिलों के बीच पुल की तरह काम करेगा और यह प्रशासनिक पहुंच और क्षेत्रीय विकास में महत्वपूर्ण साबित होगा। 21 जून 1994 को कौशिक समिति की सिफारिशें स्वीकार की गईं, लेकिन सरकारों ने देहरादून को प्राथमिकता दी। बाद में गैरसैंण को राजधानी न बनाने के लिए पर्यावरणीय और बुनियादी ढांचे की चुनौतियों का हवाला दिया गया। लेकिन आज भी यह सिफारिश स्थायी राजधानी की मांग के लिए आधार है।गैरसैंण में चल रहे सत्र में विपक्ष ने जिस तरह वॉकआउट किया, उससे यह साफ़ हो गया कि विपक्ष इस समय ‘मित्र विपक्ष’ की भूमिका निभा रहा है। हकीकत यह है कि पूर्व भाजपा विधायक और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष इस मुद्दे पर एकमत होकर विरोध नहीं कर रहे, बल्कि अपनी राजनीतिक भूमिका में संतुलन बना रहे हैं।उत्तराखंड की जनता 26 साल से यही पूछ रही है कि राजधानी का सपना कब पूरा होगा? और पहाड़ का विकास कब हकीकत मे तब्दील होगा?

बजट सत्र में गैरसैंण को क्या मिला ?

गैरसैंण में इस समय जो सत्र चल रहा है उसमें सिर्फ नेताओं की भीड़ ही देखने को मिल रही है, जो गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने की लड़ाई लड़ रहे हैं उन्हें सरकार अपने सिपाहियों से बाहर खदेड़ती नजर आ रही है। फिलहाल लगभग ₹1,11,703.21 करोड़ के इस बजट में जहां विकास की गति को बढ़ाने की बात कर रही है लेकिन जिस धरा पर यह बजट प्रस्तुत किया जा रहा है उस धरा यानि गैरसैंण के विस्तार के लिए कोई बजट क्यों नहीं प्रस्तुत किया गया। फिलहाल इतना ही कहां जा सकता है कि अस्थाई राजधानी गैरसैंण इस बजट में भी गैर ही नजर आ रहा है यानि गैरसैंण अपनी स्थायित्व के लिए आज भी जूझ रहा है।