प्रतिभागियों को प्रदान किए गए प्रमाण-पत्र
हल्द्वानी। ग्रोइंग विजडम्स अकादमी के स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम के अंतर्गत मनु लोक सांस्कृतिक धरोहर के तत्वावधान में, MAPEI के संयोजन तथा घुघुति बसुति के सह-संयोजन से आयोजित पांच दिवसीय लोक संगीत कार्यशाला का भव्य एवं भावपूर्ण समापन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत प्रतिदिन की भांति दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ की गई, जिससे पूरे आयोजन में सांस्कृतिक गरिमा और आध्यात्मिक वातावरण बना रहा। कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए सुप्रसिद्ध लोकगायिका डॉ. माधुरी बर्थवाल ने संगीत को “संग” की उपाधि देते हुए उसके सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं द्वारा ढोल थामने के संघर्षों और उनकी उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए सभी को प्रेरित किया। समापन समारोह में अपने वक्तव्य के दौरान डॉ. माधुरी बर्थवाल भावुक हो उठीं और उन्होंने उत्तराखंड (हल्द्वानी नैनीताल )को अपना “मायका” बताते हुए अपने गहरे भावनात्मक जुड़ाव को व्यक्त किया। उनके इन शब्दों ने पूरे सभागार को भावनाओं से भर दिया। कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को कुमाऊँनी लोकगीतों की परंपरा, उनकी भाव-प्रकृति एवं गायन शैली का गहन प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही झोड़ा नृत्य जैसी पारंपरिक लोकनृत्य शैली का अभ्यास भी कराया गया। समापन अवसर पर प्रतिभागियों ने कुमाऊँनी लोकगीतों और झोड़ा नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर सभी का मन मोह लिया। इस अवसर पर डॉ. माधुरी बर्थवाल के शिष्य नवीन बिष्ट ने भी पारंपरिक लोकगीतों को अपने विशेष अंदाज में प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. रेनू शरण उपस्थित रहीं, जिन्होंने कार्यशाला की सराहना करते हुए इसे वैश्विक स्तर तक पहुंचाने और प्रतिभागियों को अपने सीखे हुए ज्ञान को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

इसके अतिरिक्त कार्यक्रम में अतिथियों के रूप में पुष्पांजलि, भगवती पनेरू, डिंपल, हेमा पंत, अमृता, नीम बिष्ट एवं द्रौपदी भट्ट की गरिमामयी उपस्थिति रही। समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को उनके सफल प्रशिक्षण पूर्ण करने पर प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। प्रमाण-पत्र प्राप्त कर प्रतिभागियों के चेहरे पर उत्साह और आत्मविश्वास स्पष्ट झलक रहा था। यह आयोजन 01/04/2026 से 05/04/2026 तक जय शारदा भवन कुसुमखेड़ा, हल्द्वानी में किया गया था। समापन अवसर पर प्रतिभागियों एवं उपस्थित सदस्यों द्वारा डॉ. माधुरी बर्थवाल को स्मृति-चिह्न एवं भेंट स्वरूप उपहार प्रदान किए गए। इस दौरान कई प्रतिभागियों ने भावुक होकर अपने अनुभव साझा किए और कार्यशाला से प्राप्त सीख के लिए आभार व्यक्त करते हुए छोटे-छोटे वक्तव्य भी दिए। विदाई का यह क्षण अत्यंत भावनात्मक रहा, जहां सभी ने उन्हें सहसम्मान एवं हृदय से विदा किया। सभी प्रशिक्षुओं ने भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा का पालन करते हुए डॉ. माधुरी बर्थवाल को पुष्प मालाएं अर्पित कर भावभीनी विदाई दी। ग्रोइंग विजडम्स अकादमी, हल्द्वानी की अध्यक्ष ललिता कापड़ी ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने डॉ. माधुरी बर्थवाल के सरल, सौम्य एवं प्रेरणादायी व्यक्तित्व की सराहना करते हुए कहा कि उनका मार्गदर्शन सभी के लिए अत्यंत प्रेरणास्रोत है। कार्यक्रम में मंच संचालन अरुणा शाह द्वारा किया गया। ग्रोइंग विजडम्स अकादमी की ओर से स्वयंसेवकों में दिया एवं सिमरन ने भी सक्रिय सहयोग प्रदान कर कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस सफल कार्यशाला ने यह संदेश दिया कि लोक संस्कृति और लोक संगीत केवल हमारी परंपरा ही नहीं, बल्कि हमारी पहचान भी हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने की प्रेरणा मिलती है, जो समाज के लिए अत्यंत आवश्यक है।



























