Home उत्तराखंड प्रतिभा की पहचान और उसका उद्देश्य

प्रतिभा की पहचान और उसका उद्देश्य

42

ललिता कापड़ी, हल्द्वानी उत्तराखंड

हल्द्वानी । हर व्यक्ति के भीतर कोई-न-कोई टैलेंट जरूर छिपा होता है, लेकिन उसे पहचानना सबसे बड़ा चैलेंज होता है। अपनी प्रतिभा पहचानने का सबसे आसान तरीका यह है कि हम देखें कौन-सा काम हमें नेचुरली अच्छा लगता है और जिसे करते समय हमें टाइम का पता ही नहीं चलता। वहीं हमारी रियल स्ट्रेंथ छिपी होती है। जैसे किसी व्यक्ति को लिखना, पढ़ना और अपने थॉट्स एक्सप्रेस करना सहज लगता है, तो यह उसकी साहित्यिक प्रतिभा हो सकती है।


“जिस काम में मन को थकान नहीं बल्कि सैटिस्फैक्शन मिले, वहीं वास्तविक प्रतिभा छिपी होती है।” हर टैलेंट पॉज़िटिव भी हो सकता है और नेगेटिव भी। जो टैलेंट सोसाइटी, फैमिली और पर्सनल ग्रोथ में मदद करे, वह पॉज़िटिव है; लेकिन वही टैलेंट अगर ईगो, कॉम्पिटिशन या किसी को हर्ट करने के लिए इस्तेमाल हो, तो वह नेगेटिव बन जाता है।
जैसे बोलने की क्षमता अगर लोगों को मोटिवेट करने में लगे तो पॉज़िटिव है, और अगर किसी को एम्बैरेस करने में लगे तो नेगेटिव।

“टैलेंट की असली वैल्यू उसकी पावर में नहीं, उसकी डायरेक्शन में होती है।”
टैलेंट हमें सिर्फ पर्सनल सक्सेस नहीं देता, बल्कि सोसाइटी में एक पहचान भी देता है। जब सही प्लेटफॉर्म और रेगुलर प्रैक्टिस मिलती है, तो यही टैलेंट इंस्पिरेशन बन जाता है।
एक टीचर की टीचिंग स्किल हजारों स्टूडेंट्स की लाइफ बदल सकती है।

“जब टैलेंट दूसरों की लाइफ में डिफरेंस लाने लगे, तभी वह असली सक्सेस बनता है।”
सबसे जरूरी सवाल यह है कि हमारी प्रतिभा अगली पीढ़ी को क्या दे रही है। अगर हमारा काम किसी को इंस्पायर करता है और सोसाइटी में पॉज़िटिव चेंज लाता है, तो वही हमारी रियल लेगेसी बनती है।
एक लेखक के शब्द सालों बाद भी पढ़ने वालों को नई सोच दे सकते हैं।
“रियल टैलेंट वही है जो अपने समय से आगे जाकर आने वाली पीढ़ियों को रोशनी दे।”