Home देवभूमि फर्श पर नेशनल खिलाड़ी और डोली के भरोसे मरीज 

फर्श पर नेशनल खिलाड़ी और डोली के भरोसे मरीज 

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कपकोट के आसमान में इन दिनों रंग-बिरंगे पैराशूट तैर रहे हैं, लेकिन ज़मीन पर व्यवस्थाओं का गुब्बारा फुस्स हो गया है। एक तरफ हम ‘नेशनल लेवल’ की प्रतियोगिता कराकर दुनिया को अपनी ऊंचाइयां दिखा रहे हैं, तो दूसरी तरफ एक वायरल वीडियो ने विभाग की ‘गहराई’ नाप दी है। वीडियो में एक जांबाज पैराग्लाइडर साफ़ कह रहा है— “अगर बजट नहीं है तो साफ बता दो, हम वापस घर चले जाते हैं। वाह साहब! क्या गजब का स्वागत है। नेशनल खिलाड़ी को लगा था कि पहाड़ की मेहमाननवाजी मिलेगी, पर यहां तो ‘एक कमरे में पांच लोग’ वाला फार्मूला चल रहा है, वो भी फर्श पर। खिलाड़ियों को शायद ‘साहसिक पर्यटन’ का लाइव डेमो दिया जा रहा है कि देखो भाई, अगर आसमान से बच गए तो ज़मीन पर फर्श की ठंडक से लड़ना पड़ेगा।तभी तो वीडियो में पायलट का दर्द छलका कि बजट नहीं है तो बुलाते क्यों हो? जब इज्जत का फालूदा सोशल मीडिया पर उड़ने लगा, तो क्षेत्रीय विधायक को ‘संकटमोचक’ की भूमिका में उतरना पड़ा। करीब डेढ़ घंटे तक केदारेश्वर मैदान पर उड़ानों की जगह ‘पंचायती’ चलती रही। विधायक जी ने पायलटों को मनाया, पुचकारा और आश्वासन का ‘पैराशूट’ थमाया, तब जाकर कहीं आसमान में फिर से रौनक दिखी। लेकिन असली ‘साहस’ तो उन ग्रामीणों का है, जिन्हें किसी नेशनल कॉम्पिटिशन की ज़रूरत नहीं। कपकोट के दुर्गम इलाकों में आज भी बीमारों को ‘डोली’ में लादकर मीलों पैदल अस्पताल पहुंचाया जाता है। एक तरफ करोड़ों के पर्यटन की बातें और दूसरी तरफ कंधों पर टिकी डोली। क्या विडंबना है! हमारे पास खिलाड़ियों को सुलाने के लिए बिस्तर का बजट नहीं है और गर्भवतियों के लिए सड़कों का। पायलट तो डेढ़ घंटे के हंगामे और विधायक के दखल के बाद उड़ गए, लेकिन उन डोली उठाने वाले कंधों का क्या? उन्हें मनाने कौन आएगा? आसमान में उड़ते इन पैराशूट्स को देखकर डोली में दर्द से कराहती किसी गर्भवती ने अगर पूछ लिया कि— “साहब, बजट हमारे लिए नहीं है या सिर्फ इन उड़ानों के लिए कम पड़ गया?” तो जवाब देना मुश्किल हो जाएगा। खैर, उम्मीद है कि अगली बार जब कोई नेशनल इवेंट होगा, तो खिलाड़ियों को फर्श नहीं बिस्तर मिलेगा, और कपकोट की डोली वाली दास्तां किसी ‘नेशनल रिकॉर्ड’ की जगह पक्की सड़कों की फाइल में दर्ज होगी।