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गंगा की रक्षा के लिए मातृ सदन में जारी अनशन को मिला समर्थन

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संतों का आशीर्वाद लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जताई एकजुटता

हरिद्वार। गंगा तट स्थित तपस्थली मातृ सदन आश्रम में गंगा की अविरलता और निर्मलता की रक्षा को लेकर संतों का संघर्ष लगातार जारी है। आश्रम में ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद तथा मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती गंगा में हो रहे अवैध खनन और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के विरोध में अनशन पर बैठे हुए हैं। 10 मार्च 2026 तक यह अनशन 18 दिनों से अधिक समय से जारी है और देशभर से संत समाज, सामाजिक कार्यकर्ता तथा गंगा भक्त उनके समर्थन में मातृ सदन पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में कई सामाजिक कार्यकर्ता और धर्मसेवी मातृ सदन पहुंचे और संतों से आशीर्वाद प्राप्त करते हुए अनशन को अपना समर्थन दिया। इस दौरान संतों ने गंगा की रक्षा को धर्म और प्रकृति की रक्षा से जोड़ते हुए समाज के जागरूक लोगों से इस आंदोलन के समर्थन में आगे आने का आह्वान किया। मातृ सदन लंबे समय से गंगा की अविरलता और निर्मलता को लेकर संघर्ष करता रहा है। आश्रम के संतों का कहना है कि गंगा के तटीय क्षेत्रों में हो रहा अवैध खनन, प्राकृतिक संसाधनों का दोहन और गंगा पर बनने वाली जल विद्युत परियोजनाएं नदी के प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही हैं। वर्तमान अनशन की प्रमुख मांगों में गंगा के तटीय क्षेत्रों में अवैध खनन पर पूर्ण प्रतिबंध, गंगा और उसकी सहायक नदियों पर प्रस्तावित जल विद्युत परियोजनाओं का विरोध, दिवंगत प्रोफेसर जी.डी. अग्रवाल (स्वामी सानंद) द्वारा तैयार गंगा अधिनियम को लागू करने की मांग तथा पंजहेरी फायरिंग प्रकरण की एसआईटी जांच शामिल है। बताया गया कि ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद ने फरवरी के अंतिम सप्ताह में गंगा संरक्षण को लेकर अपना अनशन शुरू किया था। प्रारंभ में उन्होंने केवल जल, नमक, शहद और नींबू के सहारे अनशन किया, लेकिन बाद में उन्होंने जल का भी त्याग कर दिया। लगातार लंबे समय से चल रहे अनशन के कारण उनका स्वास्थ्य कमजोर होने लगा है। उनके समर्थन में मातृ सदन के संस्थापक स्वामी शिवानंद सरस्वती भी अनशन पर बैठ गए हैं।मातृ सदन के प्रमुख संत संत शिरोमणि महाराज ने इस अवसर पर कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और जीवन की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि गंगा के तटों पर हो रहा खनन और प्राकृतिक संसाधनों का दोहन नदी के अस्तित्व को खतरे में डाल रहा है। उन्होंने इसे गंगा मां की रक्षा का धर्मयुद्ध बताते हुए कहा कि समाज के जागरूक लोगों को इस आंदोलन के समर्थन में आगे आना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती द्वारा चलाए जा रहे गौ-प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध को भी संत समाज समर्थन देता है और मातृ सदन से भी कई लोग इस अभियान में धर्मयुद्ध के सैनिकों की तरह भाग लेने के लिए भेजे जा रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता पीयूष जोशी ने कहा कि मातृ सदन के संतों का आशीर्वाद प्राप्त करना उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि गंगा और गौ दोनों ही भारतीय संस्कृति की पहचान हैं और इनकी रक्षा करना समाज का दायित्व है। किसान नेता भोपाल सिंह चौधरी ने कहा कि गंगा का अस्तित्व किसानों और ग्रामीण जीवन से सीधे जुड़ा हुआ है। यदि गंगा के तटों पर अवैध खनन और अनियंत्रित परियोजनाएं चलती रहीं तो इसका सीधा प्रभाव खेती और पर्यावरण पर पड़ेगा। वहीं दंडी स्वामी बद्रीनाथ ने कहा कि गंगा केवल एक जलधारा नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और जीवन का आधार है। संत समाज सदैव गंगा और धर्म की रक्षा के लिए खड़ा रहा है और आगे भी समाज को इस दिशा में जागरूक करता रहेगा। इस अवसर पर उपस्थित सभी लोगों ने मां गंगा को साक्षी मानकर गंगा संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए एकजुट होकर कार्य करने का संकल्प भी लिया। इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता पीयूष जोशी, किसान नेता भोपाल सिंह चौधरी, दंडी स्वामी बद्रीनाथ, सामाजिक कार्यकर्ता सोमेश्वर प्रताप चौधरी, बेरोजगार संगठन के प्रदेश संयोजक जसपाल चौहान, महंत शुभम गिरी महाराज सहित कई गंगा भक्त और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।