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नव युग का निर्माता – युवा वर्ग

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ललिता कापड़ी

हल्द्वानी । चिड़िया का बच्चा जब उड़ना सीखता है और अपनी पहली उड़ान भरता है तो उसे सारा आकाश अपना नजर आता है। वह पूरे उत्साह से अपनी उड़ान भरता है। इसी प्रकार एक बालक जब युवा अवस्था में कदम रखता है तो वह सपनों की उमंग से भरा होता है वह आतुर होता है किसी भी पहाड़ को लांघने के लिए। वह उत्साहित होता है समंदर में डुबकी मार मोती निकाल लाने के लिए। वह इस कदर सकारात्मक ऊर्जा से भरा होता है कि पूरी दुनिया जीतना चाहता है।
समाज व देश की सबसे अधिक जिम्मेदारी इसी युवावर्ग पर है। यू एन एफ की द स्टेटऑफ़ वर्ल्ड पॉपुलेशन रिपोर्ट के अनुसार भारत की जनसंख्या का 68% हिस्सा 15 से 64 आयु वर्ग का है। यह भी एक कारण है कि युवा वर्ग का समाज व देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है। युवाओं में कल्पनाओं को आकार देने की अजब गजब क्षमता होती है। वह जैसी चाहे वैसी तस्वीर समाज व देश की बना सकता है। इसलिए अभिभावक व शिक्षक की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी यह है कि वह बाल्यावस्था में बच्चों के विचारों के शुद्धिकरण पर कार्य करें। एक युवा अपने समाज व देश को वही देता है जो उसने अपनी बाल्यावस्था में प्राप्त किया होता है।

वर्तमान समय में युवा वर्ग की कुछ समस्याएं ऐसी हैं जिन पर विचार करने के साथ-साथ कार्य किया जाना भी अति आवश्यक है। नशे में लिप्त होना, उद्देश्य विहीन जीवन जीना, केवल निजी सुख सुविधाओं तक सीमित रहना व देश समाज के प्रति उदासीनता। यह ऐसी समस्याएं हैं जो देश व समाज के लिए घातक हैं। इसलिए यह अति आवश्यक है कि माता-पिता अपने बच्चों की परवरिश केवल अपना वंशज समझकर नहीं देश का भविष्य समझ कर करें। शैक्षिक संस्थानों के द्वारा भी विद्यार्थियों की मानसिक मजबूती पर कार्य किया जाना आवश्यक है। जब एक युवा मानसिक दृढ़ता, सकारात्मकता, प्रगतिशील प्रवृत्ति के साथ देश को केंद्र बिंदु मानकर सोद्देश्य अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ेगा, निश्चित ही नवभारत और नवयुग का निर्माण होगा।