हल्द्वानी । कुसुमखेड़ा मुख्य चौराहे पर इन दिनों नाले का निर्माण कार्य चल रहा है।लेकिन नाले के लिए की जा रही यही खुदाई लोगो के रोज़मर्रा के कार्यों पर भारी पड़ा रही है।नाले निर्माण के चलते कई पेयजल लाइनें क्षतिग्रस्त हो गई है और टूटे नलों से लगातार पानी बह रहा है।लेकिन जिम्मेदारों की चुप्पी टूटने का नाम नहीं ले रही है। हालत यह हैं कि दो दिन से टूटी हुई पेयजल लाइन से पानी लगातार बह रहा है।यह वह पानी, है जो घरों तक तो नहीं पहुँच पा रहा, लेकिन सड़कों पर बह कर अपनी किस्मत का रोना रो रहा है। यहां सवाल यह है क्या पानी की कीमत सिर्फ बिल में ही होती है? या उसकी कीमत तब समझ आती है, जब नल सूख जाते हैं?किसी ने क्या खूब कहा है कि
“पानी बिन सब सूना लगे, सूना घर-आंगन होय,
नालों में बहता जल देखो, कैसी ये विडंबना होय।”
चौराहे के पास की कॉलोनियों में हाल ये है कि नल सूख चुके हैं।
पानी की लाइन टूट गई है, लेकिन मरम्मत की लाइन अभी तक शुरू नहीं हुई। वही स्थानीय दुकानदार बता रहे हैं कि खुदाई ने सिर्फ सड़क नहीं तोड़ी…उनका धंधा भी तोड़ कर रख दिया है।कुल मिलकर ये वही शहर है, जहाँ हर साल पानी बचाने की अपील होती है। पोस्टर लगते हैं, जल दिवस के नाम पर भाषण होते हैं लेकिन ज़मीन पर पानी यूँ ही बहता रहता है और जिम्मेदार? शायद किसी फाइल में पानी बचाने की योजना बनाने में मशगूल होते है। कुसुमखेड़ा चौराहे पर ये जो पानी बह रहा है, वो सिर्फ पानी नहीं है ये सिस्टम की लापरवाही है, और ये उस आम आदमी की बेबसी है, जिसके हिस्से में सिर्फ इंतज़ार आता है।

कुसुमखेड़ा मुख्य चौराहे पर नाले निर्माण के दौरान क्षतिग्रस्त हुई पेयजल लाइन व नाले निर्माण के लिए जाल बांधते मजदूर



























