Home जनमुद्दे “भारत का भरत” सिस्टम की भेंट चढ़ा

“भारत का भरत” सिस्टम की भेंट चढ़ा

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बिलौटी एनकाउंटर पर उठे सवाल, कविताओं में फूटा गुस्सा

गूँज उठा बिलौटी का कोना, यह कलयुग की हुँकार थी,
सिस्टम की छाती पर बरसी, वो बागी सी तलवार थी।

17 जून की सुबह बिलौटी गांव में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए 30 वर्षीय भरत भूषण तिवारी की मौत अब सिर्फ एक एनकाउंटर नहीं रही। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इन पंक्तियों ने भरत को “सिस्टम के खिलाफ बगावत का प्रतीक” बना दिया है। लोग पूछ रहे हैं, क्या “सिस्टम सुधारने” की बात करना गुनाह हो गया? शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी भरत के पिता काशीनाथ तिवारी पुलिस विभाग से रिटायर्ड चालक सिपाही हैं। भोजपुर पुलिस के अनुसार भरत पिछले कुछ सालों से मानसिक रूप से अस्वस्थ था। मगर गांववालों के लिए भरत “पागल” नहीं, एक सवाल था। ग्रामीण बताते हैं कि वो अक्सर कहता था “बिहार का पूरा सिस्टम भ्रष्ट है, इसे सुधारना है”। फेसबुक लाइव में भी वो यही दोहराता था।एनकाउंटर के बाद सोशल मीडिया पर एक सुर में आवाज उठी “भरत का एनकाउंटर गलत तरीके से किया गया”। ग्रामीणों ने शव रखकर आरा-बक्सर फोरलेन जाम कर दिया। भीड़ हटाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।

यूजर्स लिख रहे हैं: “भगत सिंह के आदर्शों पर चलना अब गैर कानूनी है क्या?” भरत का लाइव में कहना “अगर मेरे साथ छल हुआ तो युद्ध होगा”, अब बगावत का नारा बन गया है।
भरत के वीडियो में “सिस्टम भ्रष्ट है” की बात लोगों को इसलिए जुड़ रही है क्योंकि बिहार में स्कूल-पुल गिरने की घटनाएं आम हैं। CAG रिपोर्ट्स बताती हैं कि कमीशन, घटिया मटेरियल और निगरानी की कमी से सरकारी निर्माण ढहते हैं। लोग पूछ रहे हैं, गरीबों के हक की लड़ाई लड़ने वाला आखिर सिस्टम का शिकार क्यों हो गया?

हक की खातिर अड़ा रहा वो, मिटा नही वो स्वाभिमानी था,
जुल्म के आगे झुका नहीं जो, वो मर्द भरत तिवारी था !

16 जून, हाथ में लोडेड पिस्टल लिए छत पर खड़े भरत का वीडियो वायरल हुआ। नीचे थानाध्यक्ष और उसकी मां उसे समझा रहे थे। इसी वीडियो में उसने जगदीशपुर SDM को एनकाउंटर की धमकी दी थी।

17 जून सुबह पुलिस-STF की टीम भरत को पकड़ने पहुंची। भरत हथियार लहराते हुए खेतों की तरफ भागा और फेसबुक लाइव कर दिया।

पुलिस का दावा है कि भरत ने सरेंडर का नाटक कर पिस्टल फेंकी, फिर झपटकर दोबारा हथियार उठा लिया और फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में थानाध्यक्ष की गोली से घायल भरत की पीएमसीएच में मौत हो गई।

एनकाउंटर के बाद सोशल मीडिया पर एक सुर में आवाज उठी, “भरत का एनकाउंटर गलत तरीके से किया गया”। ग्रामीणों ने शव रखकर आरा-बक्सर फोरलेन जाम कर दिया। भीड़ हटाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।

देख हौसला उस बागी का, खाकी का भी दल डोल गया,
लहू में उसके आज दोबारा, वीर भगत सिंह बोल गया !

यूजर्स लिख रहे हैं: “भगत सिंह के आदर्शों पर चलना अब गैर कानूनी है क्या?” भरत का लाइव में कहना “अगर मेरे साथ छल हुआ तो युद्ध होगा”, अब बगावत का नारा बन गया है।

सिस्टम पर 3 बड़े सवाल

  1. मानसिक स्वास्थ्य : पुलिस ने खुद माना भरत अस्वस्थ था। सवाल है, इलाज के बजाय एनकाउंटर क्यों?
  2. सरेंडर के बाद गोली क्यों : मां सुमन देवी का आरोप है कि बेटे ने हथियार फेंककर सरेंडर कर दिया था। कुछ वीडियो में भी पिस्टल फेंकने का दावा है।
  3. अपनों ने ही उठाए सवाल : पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे ने इसे ‘लोकतंत्र को शर्मसार करने वाला’ बताया। मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने भी पुलिस की थ्योरी पर सवाल उठाए।

मिटा न सकोगे उस चिंगारी को, जो सीनों में अब सुलग रही,
भरत तिवारी की ये शहादत, अब क्रांति बनकर उबल रही !

लोग पूछ रहे हैं, गरीबों के हक की लड़ाई लड़ने वाला आखिर सिस्टम का शिकार क्यों हो गया? विवाद बढ़ने पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रिटायर्ड हाई कोर्ट जज से न्यायिक जांच का ऐलान किया है। भरत के पिता-भाई पर अवैध हथियार का केस दर्ज हुआ है।

पुलिस इसे आत्मरक्षा बता रही है, परिवार फर्जी एनकाउंटर। सच जांच के बाद सामने आएगा। लेकिन एक सवाल खड़ा हो गया है, सिस्टम से नाराजगी की कीमत क्या मौत है?

इंकलाब का बीज बो गया, वो ऐसा इक तूफान था,
शहीद होकर अमर हो गया, वो भारत का भरत था !

कुछ जख्म वक्त नहीं भरता, कुछ नाम कभी नहीं मिटते हैं,
भरत जैसे लोग शरीर से जाते हैं, पर यादों में जिंदा रहते हैं।

कोई बोले शहीद भगत सिंह तो कोई बोला चन्द्र शेखर आजाद ….