Home विशेष विजय की कहानी, फिल्मी स्क्रीन से सचिवालय तक का सफर

विजय की कहानी, फिल्मी स्क्रीन से सचिवालय तक का सफर

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संघर्ष, रिजेक्शन और फिर एकदम ब्लॉकबस्टर एंट्री

मेहनत करने वालों की हार नहीं होती, ये सिर्फ एक कहावत नहीं, बल्कि अनुभव का निचोड़ है जिसको एक बार फिर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी.जोसेफ विजय ने सच कर दिखाया है। कई कठिनाइयां पार करने के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के तौर पर सी. जोसेफ विजय यानी अभिनेता थलपति विजय ने 10 मई 2026 को शपथ ली। यह तमिलनाडु की राजनीति में एक नया मोड़ माना जा रहा है क्योंकि विजय ने सिर्फ 2 साल पहले टी.वी.के. (तमिलागा वेट्री कड़गम) पार्टी बनाकर पहला विधानसभा चुनाव लड़ा और 108 सीटें जीतकर सरकार बनाई। 10 मई 2026 को सुबह 10 बजे चेन्नई के जवाहरलाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में शपथ ग्रहण समारोह हुआ। पहले ये समारोह दोपहर 3:45 बजे होना था लेकिन ज्योतिष की सलाह पर समय बदलकर सुबह कर दिया गया। राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने विजय को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
शपथ ग्रहण की शुरुआत वंदे मातरम से हुई, उसके बाद राष्ट्रगान और फिर तमिलनाडु का राजकीय गान ‘तमिल थाई वाज़्थु’ बजाया गया। समारोह में कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी मौजूद रहे।
विजय के साथ 9 विधायकों ने कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली। इनमें आधव अर्जुन, एन आनंद, के.ए. सेंगोट्टैयन, एस. कीर्तना जैसे नाम शामिल हैं। विजय ने गृह, पुलिस और सामान्य प्रशासन जैसे अहम विभाग अपने पास रखे हैं।
आपको बता दें कि विजय का जन्म 22 जून 1974 को चेन्नई में मशहूर डायरेक्टर एस.ए. चंद्रशेखर के घर हुआ। पिता चाहते थे बेटा एक्टर बने, लेकिन शुरुआत आसान नहीं थी। 1992 में फिल्म नालाया थिरुप्पु से डेब्यू किया और शुरुआती कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रहीं। लोगों ने कहा “स्टार मटेरियल नहीं है”। लेकिन विजय ने हार नहीं मानी। 1996 में पूवे उनक्कागा और 1998 में कधलुक्कु मरियादाई से उन्हें पहचान मिली। इसके बाद थुप्पक्की, घिल्ली, मास्टर जैसी हिट्स ने उन्हें तमिल सिनेमा का “थलपति” बना दिया।
विजय के फैन क्लब हमेशा सामाजिक कार्यों में एक्टिव रहे जैसे रक्तदान कैंप, बाढ़ राहत, गरीब बच्चों की पढ़ाई इत्यादि। 2023-24 में उन्होंने धीरे-धीरे राजनीति में कदम रखना शुरू किया। 2024 में उन्होंने तमिलगा वेट्री कझगम TVK नाम से अपनी पार्टी लॉन्च की और कहा कि 2026 का चुनाव सीधे DMK से होगा। कई पंडितों ने इसे मजाक कहा, क्योंकि DMK-AIADMK 59 साल से तमिलनाडु की राजनीति पर काबिज थे। आखिरकार 4 मई 2026 के चुनाव में TVK ने 234 में से 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बन गई, लेकिन बहुमत के लिए 118 चाहिए थीं। इसके बाद विजय को कांग्रेस, CPI, CPM, VCK, IUML जैसे दलों से समर्थन लेकर सरकार बनानी पड़ी।
चुनाव प्रचार के दौरान विजय ने DMK पर आरोप लगाया कि वो TVK की रैलियों और डोर-टू-डोर कैंपेन की अनुमति जानबूझकर देर से दे रहे हैं या रद्द कर रहे हैं। उन्होंने कहा ये उनके बढ़ते जनसमर्थन को रोकने की कोशिश है।
विजय ने पारंपरिक राजनीति को उलट दिया। न बड़ी रैलियां, न प्रेस कॉन्फ्रेंस, न इंटरव्यू, उन्होंने सोशल मीडिया और “वर्ड ऑफ माउथ” को हथियार बनाया। घोषणापत्र भी तिरुवल्लुवर के तिरुक्कुरल के सिद्धांतों अरम-सदाचार, पोरुल-धन, इनबम-आनंद पर आधारित था।

विजय की जीत सिर्फ स्टारडम की वजह से नहीं थी। उनके 11 वादों ने लोगों को आकर्षित किया। महिलाओं को 2500 रुपये महीना, 200 यूनिट मुफ्त बिजली, 6 LPG सिलिंडर मुफ्त, किसानों का कर्ज माफी, ग्रेजुएट्स को 4000 रुपये भत्ता। उन्होंने खुद कहा कि वो स्टालिन की तरह “खोखले वादे” नहीं करेंगे। आखिरकार 59 साल बाद तमिलनाडु में DMK-AIADMK का किला टूटा है और पहली बार कोई तीसरी शक्ति सत्ता में आई है।