Home उत्तराखंड हार के बाद EVM पर सवाल, सुरक्षा कब होगी पुख्ता?

हार के बाद EVM पर सवाल, सुरक्षा कब होगी पुख्ता?

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हर चुनाव में कहीं शांतिपूर्ण मतदान होता है तो कहीं प्रशासन को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। नतीजे आते ही हारने वाले प्रत्याशी अक्सर ईवीएम को ही कटघरे में खड़ा कर देते हैं। मतदान से पहले जहां जीत-हार की चर्चा होती है, परिणाम के बाद बहस का रुख ईवीएम की विश्वसनीयता पर मुड़ जाता है।

ऐसे में सवाल उठता है कि चुनाव आयोग ईवीएम की सुरक्षा को लेकर और सख्त कदम क्यों नहीं उठाता? आयोग को चाहिए कि मतदान से पहले सभी ईवीएम मशीनों की जांच प्रत्याशियों के सामने हो। जितने मतदाता क्षेत्र में हैं, उतने ही डमी वोट डलवाकर मशीन की परख की जाए। इससे प्रत्याशियों का भरोसा बढ़ेगा।

दूसरा सुझाव तकनीक से जुड़ा है। ईवीएम में ऐसी चिप क्यों न लगाई जाए जो छेड़छाड़ या अनधिकृत टच होते ही अलर्ट जारी करे। यह अलर्ट सीधे क्षेत्र के सभी प्रत्याशियों के मोबाइल पर पहुंचे। साथ ही स्ट्रॉन्गरूम की लाइव सीसीटीवी फीड प्रत्याशियों को उपलब्ध कराई जाए ताकि वे कहीं से भी मशीन की स्थिति देख सकें।

हाल ही में पश्चिम बंगाल में ईवीएम में आग लगने की घटना ने मशीनों की सुरक्षा और निष्पक्षता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसी घटनाएं जनता और प्रत्याशियों का भरोसा तोड़ती हैं।

2027 विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग को इस दिशा में ठोस काम करना होगा। अगर आयोग पहल नहीं करता तो 2027 में चुनाव लड़ रहे सभी दलों और उम्मीदवारों को एकजुट होकर यह मांग रखनी चाहिए।

जब तक ईवीएम की सुरक्षा और पारदर्शिता पर हर प्रत्याशी संतुष्ट नहीं होगा, तब तक हार-जीत को निष्पक्षता से स्वीकार करना मुश्किल रहेगा। चुनाव की विश्वसनीयता बचाने के लिए आयोग को अब तकनीक और पारदर्शिता दोनों मोर्चों पर कदम बढ़ाने होंगे।