हल्द्वानी में शहीद भरत भूषण तिवारी को श्रद्धांजलि, पियूष जोशी का सिस्टम पर तीखा प्रहार
हल्द्वानी। बिहार के जमानिया गांव में मृदा कटाव और जलभराव से पूरे गांव के डूबने की समस्या उठाने वाले, प्रशासन से शांतिपूर्ण जवाब न मिलने पर हथियार उठाने को मजबूर हुए और बाद में पुलिस के आश्वासन पर सरेंडर करने के बावजूद कथित फर्जी एनकाउंटर में मारे गए अमर क्रांतिकारी भरत भूषण तिवारी को रविवार हल्द्वानी में आयोजित विशेष श्रद्धांजलि सभा में नम आंखों से याद किया गया। सभा में बड़ी संख्या में जुटे लोगों ने पुष्प अर्पित कर “भरत भूषण तिवारी अमर रहें” के नारों के साथ श्रद्धा व्यक्त की। माहौल बेहद भावुक था। सभा को संबोधित करते हुए वक्ता समाजसेवी पियूष जोशी ने समाज के दोहरे चरित्र पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने मंच से कहा, “क्रांतिकारियों को मरणोपरांत तुम्हारी श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि जीते जी तुम्हारे साथ और समर्थन की आवश्यकता होती है!”
पियूष जोशी ने सवाल उठाया कि व्यवस्था से लड़ रहे बागियों का जीते जी साथ देने से लोग क्यों कतराते हैं, और उनके जाने के बाद मोमबत्तियां लेकर क्यों निकल पड़ते हैं। उन्होंने इसे हर उस व्यक्ति के लिए कड़वा सच बताया जो अन्याय के खिलाफ लड़ाई का हिस्सा बनना चाहता है।
भरत भूषण तिवारी बिहार के जमानिया गांव की डूब और विस्थापन की समस्या को लेकर संघर्षरत थे। प्रशासन से बार-बार गुहार के बाद भी समाधान न मिलने पर उन्होंने हथियार उठाए। बाद में प्रशासन के आश्वासन पर उन्होंने हथियार पुलिस के पांव में फेंककर सरेंडर कर दिया। आरोप है कि इसके बावजूद पुलिस ने उनका फर्जी एनकाउंटर कर दिया।
सभा में मौजूद लोगों ने इस घटना को न्याय व्यवस्था पर बड़ा सवाल बताया और कहा कि यह सिर्फ शोक संदेश नहीं, बल्कि सिस्टम को जगाने की आवाज है। सभा का समापन “इंकलाब जिंदाबाद” के नारों के साथ हुआ।






























