उत्तरकाशी । काशी विश्वनाथ की पावन और तपोमयी धरा उत्तरकाशी में बुधवार सायं को भक्ति की अविरल धारा और साहित्य की सरिता का अद्भुत मिलन हुआ। ‘गायत्री कुंज’ के प्रांगण में ‘प्रभव साहित्य मंच’ (उत्तरकाशी) और संपर्क संस्थान (जयपुर) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ‘काव्य संध्या’ ने मां गंगा के प्रति गहरी आस्था और साहित्यिक गंभीरता को एक मंच पर पिरो दिया।

इस सृजनात्मक संध्या का आयोजन और संयोजन प्रभव साहित्य मंच की संस्थापिका और प्रखर कवयित्री डॉ. साधना जोशी और संपर्क संस्थान की सह-सचिव एवं लेखिका शशि कुड़ियाल चंद्रभा द्वारा किया गया। कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन में आशिता डोभाल का विशेष एवं सराहनीय सहयोग रहा। गोष्ठी की अध्यक्षता श्रीमती मधुलिका थपलियाल द्वारा की गई।
गोष्ठी का विशेष आकर्षण डॉ. साधना जोशी द्वारा गाया गया पारंपरिक ‘बाजूबंद’ रहा, जिसके सुरीले और भावपूर्ण गायन ने उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। काव्य पाठ के दौरान कल्पना असवाल, सरिता भंडारी, गरिमा राणा और रेखा पयाल ने मां गंगा को समर्पित अपनी कालजयी रचनाओं के माध्यम से उनकी दिव्यता और जन-जीवन पर उनके प्रभाव को अत्यंत भावपूर्ण शब्दों में उकेरा।

इसी क्रम में माधव शास्त्री और शशि कुड़ियाल चंद्रभा ने स्त्री विमर्श पर अपनी प्रस्तुति दी l इस दौरान सभी रचनाकारों और उपस्थित प्रबुद्ध जनों ने प्रभव साहित्य मंच और संपर्क संस्थान के साहित्यिक योगदान और राजस्थान एवं उत्तराखंड के इस साहित्यक मिलन की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

कार्यक्रम के अंतिम सोपान में डॉ. साधना जोशी ने गायत्री कुंज परिवार और उपस्थित सभी साहित्यकारों का हृदय से आभार व्यक्त किया। यह आयोजन न केवल उत्तरकाशी की साहित्यिक चेतना को समृद्ध करने वाला रहा, बल्कि गंगा, साहित्य और स्त्री-विमर्श के प्रति जनमानस की चेतना को नई दिशा देने वाला भी सिद्ध हुआ।






























