Home उत्तराखंड ग्रोइंग विजडम्स अकादमी के तत्वावधान में पाँच दिवसीय लोक संगीत कार्यशाला का...

ग्रोइंग विजडम्स अकादमी के तत्वावधान में पाँच दिवसीय लोक संगीत कार्यशाला का भव्य शुभारंभ

876

हल्द्वानी। ग्रोइंग विजडम्स अकादमी के तत्वावधान में, मनु लोक सांस्कृतिक धरोहर संवर्धन संस्थान एवं घुघुती बसूती वेलफेयर एसोसिएशन के सहयोग से कुसुमखेड़ा स्थित जय शारदा भवन में पाँच दिवसीय लोक संगीत कार्यशाला का भव्य शुभारंभ हुआ। इस कार्यशाला का संचालन पद्मश्री से सम्मानित लोकगायिका डॉ. माधुरी बड़थ्वाल द्वारा किया जा रहा है।
कार्यक्रम का शुभारंभ गरिमामय वातावरण में हुआ, जहाँ अकादमी की अध्यक्षा ललिता कपड़ी एवं जय शारदा समिति के अध्यक्ष नीमा बिष्ट ने डॉ. माधुरी बड़थ्वाल का पुष्पगुच्छ एवं सम्मान स्वरूप स्वागत किया। इसके पश्चात डॉ. बड़थ्वाल एवं उनकी टीम द्वारा प्रस्तुत गणेश स्तुति ने पूरे सभागार को भक्तिमय कर दिया, जिसमें सभी प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। अपने प्रेरणादायक उद्बोधन में डॉ. बड़थ्वाल ने शास्त्रीय एवं लोक संगीत के बीच के अंतर को सहजता से स्पष्ट करते हुए कहा कि लोक संगीत हमारी सांस्कृतिक पहचान, परंपराओं और भावनात्मक विरासत का सशक्त आधार है। उन्होंने अपने नजीबाबाद के अनुभव साझा करते हुए यह संदेश दिया कि सच्ची लगन और सीखने की इच्छा हो तो व्यक्ति किसी भी परिस्थिति में ज्ञान अर्जित कर सकता है।
लोक संस्कृति में हो रहे परिवर्तनों पर विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि पलायन के कारण बदलाव स्वाभाविक है, किंतु अपनी जड़ों से जुड़ाव बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। समय-समय पर अपनी संस्कृति की ओर लौटना ही उसे जीवंत बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
कार्यशाला के प्रथम दिवस पर प्रतिभागियों को क्षेत्रीय झोड़े, शगुन आखर तथा कुमाऊँनी लोकगीतों जैसे “मासी का फूल”, “धनी का सुनार” और “अब एगो रंगीलो चैता” का अभ्यास कराया गया। सभी प्रतिभागियों, विशेषकर महिलाओं ने अत्यंत उत्साह और समर्पण के साथ सहभागिता की। प्रथम दिवस में लगभग 30 महिलाओं की सक्रिय उपस्थिति रही।
कार्यक्रम के समापन पर अकादमी की अध्यक्षा ललिता कपड़ी ने सभी अतिथियों, सहयोगी संस्थाओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर अमृता पांडे, पुष्पलता जोशी ‘पुष्पांजलि’, दीक्षा जोशी, मीनू जोशी, हेमा हरबोला, नीमा बिष्ट एवं दया अथानी सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। मंच संचालन अरुणा शाह द्वारा प्रभावशाली ढंग से किया गया, जबकि अकादमी की ओर से दिया एवं सिमरन ने स्वयंसेवक के रूप में सराहनीय सहयोग प्रदान किया।
यह कार्यशाला न केवल प्रतिभागियों को लोक संगीत की बारीकियों से परिचित करा रही है, बल्कि उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों के प्रति जागरूक रहने और उनके संरक्षण हेतु प्रेरित भी कर रही है।