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बुकिंग के बाद भी नहीं मिल रही गैस

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सिस्टम के दावों पर भारी जमीनी हकीकत

हल्द्वानी। एक तरफ उत्तराखंड में रसोई गैस की किल्लत दिन-ब-दिन गहराती जा रही है, तो दूसरी तरफ जिम्मेदार अधिकारी कागज़ों और बयानों में आपूर्ति व्यवस्था को “सामान्य” बताने में जुटे हैं। हालात यह हैं कि उपभोक्ता बुकिंग कराने के कई दिनों बाद भी सिलेंडर का इंतज़ार कर रहे हैं, लेकिन दफ्तरों में सब कुछ दुरुस्त बताया जा रहा है। शहर और आसपास के क्षेत्रों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें आम हो चुकी हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि ऑनलाइन बुकिंग के बाद भी डिलीवरी में 10 से 15 दिन तक का समय लग रहा है। कई जगहों पर तो लोगों को बार-बार एजेंसी के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, लेकिन समाधान के नाम पर सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है। वहीं, जिला स्तर के अधिकारी लगातार यह दावा कर रहे हैं कि गैस की आपूर्ति पूरी तरह से सुचारू है और कहीं कोई समस्या नहीं है। अधिकारियों के इन बयानों और आम जनता की परेशानियों के बीच बड़ा विरोधाभास साफ नजर आ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आपूर्ति वास्तव में सामान्य है, तो फिर इतनी देरी और अव्यवस्था क्यों हो रही है? कई उपभोक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि एजेंसियों द्वारा पारदर्शिता नहीं बरती जा रही और प्राथमिकता तय करने में भी गड़बड़ी हो रही है। अब सवाल यह है कि आखिर जमीनी हकीकत को नजरअंदाज कर सिर्फ कागज़ी दावों से कब तक काम चलाया जाएगा? जरूरत इस बात की है कि जिम्मेदार अधिकारी खुद मैदान में उतरकर स्थिति का जायजा लें और आम जनता को राहत दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए।

हरीनगर की जनता पूछ रही आखिर कब मिलेगी गैस

हल्द्वानी। वार्ड 42 के हरिनगर क्षेत्र के आर.सी. पुरम में बीते दो सप्ताह से इंडियन गैस की सप्लाई ठप है और अब जनता का गुस्सा फूट पड़ा है। बड़ा सवाल यह है कि इसके लिए जिम्मेदार कौन है, लोगों का आरोप है कि बुकिंग के बावजूद एजेंसी गैस का वाहन क्षेत्र में नहीं भेज रही और न डिलीवरी से संबंधित कोई साफ जवाब मिल पा रहा है। हालात ये हैं कि लोग एक-दूसरे के सिलेंडर के सहारे गुजारा कर रहे हैं। यहां सवाल यह है कि क्या यही है ‘घर-घर गैस डिलीवरी’ का प्रशासन का दावा?उपभोक्ताओं का कहना है कि एक तरफ प्रशासन कहता है हर घर गैस पहुंचेगी वही दूसरी तरफ बुकिंग के बाद भी गाड़ी नहीं आती। गैस का इंतजार कर थक चुके स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि अगर यही हाल रहा, तो वे मजबूरन अपना इंडियन गैस कनेक्शन सरेंडर करने को बाध्य होंगे या फिर एजेंसी बताए कि आखिर दो हफ्तों से गैस क्यों नहीं पहुंची? कुल मिलाकर हरिनगर की जनता पूछ रही है कि आखिर उन्हें कब मिलेगी गैस?