Home शशि कुड़ियाल " चन्द्रभा" सशक्त नारी : मौलिक व स्व रचित

सशक्त नारी : मौलिक व स्व रचित

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शशि कुड़ियाल “चन्द्रभा”

देहरादून। “नीमा अरी ओ नीमा, उफ्फ कहां चली गई यह, एक तो पहले ही लेट हो गई हूं नारी सशक्तिकरण कार्यक्रम के लिए ऊपर से इसकी कछुए की स्पीड “
शैफाली अपने आप में ही बड़बड़ाए जा रही थी और अपने घर की नौकरानी नीमा पर चिल्ला रही थी l

शैफाली एक उच्च शिक्षित, अति धनाढ्य और आधुनिक कहे जाने वाले परिवार की लगभग 43 वर्षीय सुंदर, आकर्षक, पढ़ी लिखी लेकिन बहुत ही शॉर्टटेंपर्ड, घमंडी और बददिमाग महिला थी, जबकि कहने को वह एक समाज सेविका थी। एक एनजीओ की संस्थापक भी थी और बहुत सारे सोशल वेलफेयर के कार्य करने वाली संस्थाओं से जुड़ी हुई थी लेकिन सब केवल झूठी पब्लिसिटी के लिए।
उसके पति गौरव सक्सेना एक शांत , सज्जन व्यक्ति थे। साथ ही बहुत बड़े और सफल बिजनेसमैन थे और समाज में उनका अच्छा खासा दबदबा और हैसियत थी लेकिन बेचारे पत्नी के सामने उनकी एक न चलती थी, आखिर चलती भी कैसे ? शैफाली को कुछ भी कहना या राय देना मानो अपने सिर्फ सिर को ही नही बल्कि पूरे शरीर को ही ओखली और मूसलों के हवाले करना था।
तो बेचारे सक्सेना जी की ज़िन्दगी एक समझौता बन कर ही रह गई थी।

शैफाली का खौफ और चिड़चिड़ा स्वभाव कुछ ऐसा था कि अठारह वर्षीय बेटी रिया और सोलह साल का बेटा रोहन भी मां के सामने पड़ने से सदा बचने की ही कोशिश करते थे। पति देव अक्सर शैफाली को उसके बुरे व्यवहार के लिए टोकते लेकिन शैफाली पर इन चीज़ों का ज्यादा असर न होता था।

“दीदी दो दिन से मुझे बहुत तेज बुखार आ रहा है, और पूरे शरीर में भी दर्द है, अगर मुझे आज एक दिन का आराम मिल जाता तो,:::: ” नीमा ने आकर कहा।

“क्या कहा मतलब तुझे आज काम नही करना है, एक तो पहले ही मैं अपने कार्यक्रम के लिए लेट हो गई हूं ऊपर से तेरा ये नाटक, कोई छुट्टी नही मिलेगी तुझे, तेरा रहना, खाना, और इतनी ज़्यादा पगार तेरे नाटक देखने के लिए नही देती हूं मैं तुझे और वैसे भी शाम को मेरी आठ, दस सहेलियों ने खाने पर आना है, तो तुझे पूरा खाना तैयार करना है,क्या क्या बनाना है उसकी लिस्ट मैंने किचन काउंटर पर रखी है,जा कर देख ले।”

“पर दीदी……” नीमा ने कांपते हुए कुछ कहने की कोशिश की लेकिन शैफाली का गुस्से में तमतमाया चेहरा देखकर बेचारी डर गई।
अचानक शैफाली की नज़र बेटी रिया पर पड़ी जो काफ़ी देर से वहीं खड़ी थी ” अरे रिया तुम तैयार हो न, याद है न तुम्हें आज मेरे साथ मेरे कार्यक्रम में चलना है,आखिर तुम्हें भी तो पता चले कि तुम्हारी मां का कितना रुतबा है, और फिर एक दिन तुमको भी तो मेरी तरह बनना है” शैफाली ने बड़े गर्व से कहा,

“वो सब तो ठीक है मां लेकिन बेचारी नीमा आंटी को छुट्टी दे दो एक दिन के लिए ,काम तो मैनेज हो ही जायेगा, मैं अपनी सहेली के कुक को बुला लूंगी “।
“बस बस,, बहुत हो गया जो तुम्हारा काम नही है उसमें दखलंदाजी मत करो और चलो जल्दी, देर हो रही है “
बेचारी रिया चुपचाप मां के पीछे गाड़ी की तरफ चल दी।
“चलो मान सिंह” शैफाली ने ड्राईवर से कहा

इतने में शैफाली के मोबाईल की घंटी बज उठती है।
“हैलो, जी शर्मा जी कहिए, सारी तैयारियां हो चुकी हैं न”
“जी मैडम, दरअसल आपसे कुछ बहुत ज़रूरी बात करनी
थी ” शर्मा जी ने कुछ नर्वस भाव से कहा। ” आ,,देखिए मैडम बात यह है कि संस्था की कार्यकारिणी ने इस बार प्रदेश गौरव का सम्मान आपको नही बल्कि मीरा मैडम को देने का फैसला किया है क्योंकि कार्यकारिणी का मानना है कि उनकी उपलब्धियां और समाज सेवा के कार्य आपसे कहीं अधिक है और वैसे भी दो सालों से यह सम्मान लगातार आपको ही मिल रहा है “।

“क्या उलजुलूल बोले जा रहे हैं आप शर्मा जी ? कल की आई मीरा को इतना बड़ा सम्मान ? वो तो क्या, मेरे अलावा संस्था की कोई भी दूसरी महिला इसके लायक नही है। कोई मुझसे आगे बढ़ने की कोशिश करे यह मैं बर्दाश्त नही करूंगी और अगर यह सम्मान मुझे नही मिला तो मेरे पति के रूप में आपको जो इतना बड़ा फाइनेंसर मिला हुआ है न उससे आप हाथ धो बैठेंगे” शैफाली ने अपने पैसे का रौब दिखाते हुए और लगभग धमकाते हुए कहा।
” अरे अरे, मैडम आप नाराज़ मत होइए मैं तुरन्त कार्यकारिणी की ज्यूरी से इस बारे में बात करता हूं,भला आपसे अधिक योग्य कोई दूसरा कैसे हो सकता है “शर्मा जी ने माथे का पसीना पोंछते हुए कहा !

और फिर कार्यक्रम में पहुंच कर शुरू हुआ शैफाली का भाषण
“”मेरी प्यारी बहनों , वक्त आ गया है कि हम इन पुरुषों को बता दें कि हम नारियां कितनी सशक्त हैं। हमें भी इनके समान अधिकार हैं, हम जो चाहे वो पहन सकते हैं, जितनी देर तक घर से बाहर रहना चाहें, रह सकते हैं, केवल बच्चे और घर संभालना ही हमारा काम नही है, हम अबला नहीं हैं लेकिन हां, एक दूसरे को मजबूत बनाने के लिए हम महिलाओं को एक दूसरे का साथ देना होगा,एक दूसरे की प्रतिभा को आगे बढ़ाना होगा l अब दुनिया को नारी सशक्तिकरण का वास्तविक अर्थ समझाने का समय आ गया है !’

शैफाली के भाषण के दौरान संस्था की कार्यकारिणी की महिलाओं में कानाफूसी चल रही थी “अपने आगे किसी को कुछ नही समझती है। अन्य महिलाओं को कभी प्रोत्साहन या तारीफ के दो शब्द नही बोलती, किसी और की प्रतिभा का कोई मान नही करती और बातें देखो। हूं, स्वार्थी और झूठी एक नम्बर की”।

कार्यक्रम समाप्ति के बाद कई जबरदस्ती हासिल किए हुए पुरुस्कार और झूठी तारीफों को समेटे हुए जब शैफाली और रिया घर पहुंचे तो देखा कि किचन में नीमा नही बल्कि माया जो कि घर की, और बगीचे की मेंटेनेंस का काम देखती थी, वह खाना बना रही थी। उसको देखते ही शैफाली गुस्से से तिलमिलाते हुए बोली ,” तुम यहां और वो भी किचन में इस तरह ,, किस की इजाज़त से तुम खाना बना रही हो, और वो कामचोर नीमा कहां है ?”

“मैडम मुझसे नीमा दीदी की हालत देखी नही गई, उन्हें बहुत चक्कर आ रहे थे, उन्हें वाकई आराम की ज़रूरत है, इसलिए मैंने उन्हें कहा कि वो आराम करें, खाना मैं तैयार कर दूंगी”। आपका फ़ोन बंद था तो रिया मैडम से मैंने परमिशन ले ली थी खाना बनाने की”।
“तेरी इतनी हिम्मत कब से हो गई कि मेरी मर्जी के बगैर कुछ करे, खैर तुझे तो मैं बाद में देखूंगी, पहले उस कामचोर को ठीक करती हूं ” कहकर शैफाली जैसे ही तेजी से बाहर को जाने लगी तो रिया ने उसका हाथ पकड़ लिया।

“मां ,आपका महिला सशक्तिकरण का लाइव भाषण देखा ,बहुत अच्छा बोला आपने लेकिन अफसोस कि आपकी कथनी और करनी में जमीन आसमान का फर्क है “
” रिया क्या बक रही हो तुम,” शैफाली ने गुस्से में चिल्लाते हुए कहा
” हां मां आपके पैसे के घमंड और स्वार्थ ने आपको इंसान के ओहदे से नीचे गिरा दिया है, और जिस पति के पैसों पर आपको इतना घमंड है उन को ही आप कुछ नही समझती, ना घर के बुजुर्गों की इज्जत और ना ही बच्चों के प्रति कोई जिम्मेदारी। क्या आपको एहसास भी है कि आपके इस गुस्से और चिड़चिड़े व्यवहार की वजह से आपके बच्चे और पति आपसे कितनी दूर हो गए हैं ? घुटन होती है हमें आपके स्वार्थी और बुरे व्यवहार से”!
रिया बोलती ही चली गई,
“नारी सशक्तिकरण की बात करती हो आप और दूसरी नारी के ही दुख को नही समझती हो, अन्य महिलाओ का हक छीनकर जबरदस्ती खुद को सम्मान दिलाना, दूसरी महिलाओं को नीचा दिखाना , पैसे का रौब जमाना, ये सब नारी सशक्तिकरण नही होता, नारी सशक्तिकरण वो है जब एक नारी अपने निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरी नारी को एक मजबूत हाथ देकर सशक्त बनाती है ,जो आज माया दीदी ने नीमा आंटी के लिए किया है, अपने काम के साथ साथ उनके काम की भी जिम्मेदारी ली है, उनकी मदद की है, वो एक सशक्त महिला हैं, आप नही “।

शिखा के मुंह से ये सारी बातें सुनकर शैफाली सन्न्न रह गई उसे समझ नही आ रहा था कि रिया इतनी बड़ी और बदतमीज कब से हो गई, जो उससे इस तरह व्यवहार कर रही थी जिसे वो अपना दबदबा समझ कर इतराती रही थी, वो सारा भ्रम जैसे चकनाचूर हो गया।

“रिया तुम इन बातों के बारे में नही जानती, अभी तुम नादान हो लेकिन तुम्हें ये सब समझना चाहिए ताकि तुम भी मेरी तरह बन सको “

“नही मां, मुझे आपके जैसा नही बनना है ” रिया ने लगभग चिल्लाते हुए कहा”आपके जैसा स्वार्थी बनने से अच्छा है कि मैं माया दीदी जैसी बन जाऊं, दयालु और संवेदनशील “।
शैफाली मानों सातवें आसमान से नीचे गिर गई हो, उसके कानों में रिया के शब्द बार बार गूंजने लगे” मुझे आपके जैसा नही बनना है “

शोर सुनकर सक्सेना जी और रोहन भी वहां पहुंच गए l सक्सेना जी ने रिया को मां के साथ इस तरह बात न करने की हिदायत दी, और रिया और रोहन को उनके कमरे में भेज दिया l
“देखिए न रिया कितनी बदतमीज हो गई है, अब आप ही इसे सुधारिए”
“ये तो एक दिन होना ही था, आज रिया ने ये सब कहा है कल रोहन भी कहेगा, और सुधरने की ज़रूरत रिया को नही बल्कि तुम्हें है ” कहकर सक्सेना जी भी वहां से चले गए।

शैफाली को काटो तो खून नही , इन्सान चाहे कैसा भी हो पर अपने बच्चों की नज़र में कभी नही गिरना चाहता लेकिन आज शैफाली अपने बच्चों के साथ साथ अपनी नजरों से भी गिर गई थी,आज उसे लगा कि वह अपने ही परिवार में कितनी अकेली हो गई है, और इस सब की ज़िम्मेदार वह खुद थी।

दुख और पछतावा उस पर इतना हावी हुआ कि अचानक वह लड़खड़ा कर गिरने ही वाली थी कि तभी माया ने उसे संभाल लिया “मैडम, संभालिए खुद को, बच्ची की बात को इस तरह दिल पर मत लीजिए, आप तो एक मजबूत और सशक्त नारी हैं “
शैफाली ने माया की तरफ देखा, आज उसे करुणा, और दया से परिपूर्ण माया के सम्मुख अपना व्यक्तित्व बहुत ही बौना लग रहा था, अनायास ही वह बोल पड़ी”नही माया सशक्त महिला मैं नही बल्कि तुम हो, आज मुझे समझ में आया है कि, दया, ममता और करुणा ये स्त्री सुलभ गुण, नारी का स्त्रीत्व,एक महिला की कमज़ोरी नही बल्कि ताकत हैं, और जब वह अपने साथ साथ अन्य महिलाओं की भी मदद और आदर करती है तब वह वास्तव में वह एक सशक्त महिला कहलाती है “

और आज शैफाली ने खुद से एक सशक्त महिला बनने का वादा किया, आज शैफाली को वास्तव में सशक्त महिला होने का अर्थ ज्ञात हो चुका था !