Home उत्तराखंड हवाई सेवा की उड़ान या ज़मीनी संकट से ध्यान भटकाने की कोशिश?

हवाई सेवा की उड़ान या ज़मीनी संकट से ध्यान भटकाने की कोशिश?

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यानी एक तरफ आसमान में जहाज़ है, दूसरी तरफ ज़मीन पर ईंधन का संकट

लोकतंत्र में असली उड़ान हवाई जहाज़ से नहीं, जवाबदेही से तय होती है

देहरादून। एक बार पुनः देहरादून से पिथौरागढ़ के बीच फिर से हवाई सेवा का मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुभारभ किया।
तस्वीर में सब कुछ लोक लुभावन है। मुस्कानें हैं, विकास के दावे हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी विमान सेवा को हरी झंडी दिखाते हैं, और कहते हैं कि अब देहरादून से पिथौरागढ़ की दूरी महज़ एक घंटे की रह गई है, लेकिन सवाल यहीं से शुरू होता है। सात महीने पहले, सितंबर 2025 में, यही सेवा तकनीकी कारणों के चलते संचालन बंद होने से ठप हो गई थी।
यानी उड़ान नई नहीं है बस कहानी पुरानी है और मंच नया है।रामनवमी के शुभ अवसर पर इसे फिर से शुरू किया गया।
सरकार कहती है कि यह सेवा सीमांत क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ेगी। केंद्र सरकार की महत्वकांक्षी उड़ान योजना 2.0, जिस में 100 नए हवाई अड्डे, 200 हेलीपैड का 29 हजार करोड़ रुपये का सपना शामिल है। कागज़ पर सब कुछ तेज़ी से उड़ रहा है, लेकिन ज़मीन पर?राज्य में गैस की किल्लत बढ़ने की खबरें सुर्खियों में हैं।

डीजल और पेट्रोल को लेकर भी यही आशंका जताई जा रही है।यानी एक तरफ आसमान में जहाज़ है, दूसरी तरफ ज़मीन पर ईंधन का संकट। ऐसे में क्या एक घंटे की हवाई यात्रा, उस नागरिक के लिए मायने रखती है जो रोज़ गैस सिलेंडर या पेट्रोल के लिए लाइन में खड़ा है? या फिर यह एक ऐसी तस्वीर है, जिसमें विकास दिखता है लेकिन सवाल छिप जाते हैं, पर लोकतंत्र में असली उड़ान हवाई जहाज़ से नहीं, जवाबदेही से तय होती है।