मोहन पलिया, फ़िरोज़ाबाद (उत्तर प्रदेश)
अगर कुछ है जो मुझे आप से या किसी और से जोड़ कर रखता है तो वह है, “रिश्ता”। यहां हम सब एक दूसरे के साथ किसी न किसी रिश्ते में बंधे हुए हैं जिस में कुछ रिश्ते ऐसे हैं जो जन्म के साथ से हैं और कुछ ऐसे जो हम ने खुद बनाए हैं। माता, पिता, भाई, बहन… आदि कुछ ऐसे रिश्ते हैं जो जन्म से हैं या ये भी कह सकते हैं कि ये खून के रिश्ते हैं वहीं दोस्ती और शादी एक प्रेम का रिश्ता है। शादी का रिश्ता सिर्फ दो लोगों को नहीं बल्कि दो परिवारों को आपस में जोड़ता है। एक पवित्र रिश्ता जिस में एक लड़का और एक लड़की सात जन्मों तक साथ निभाने का वादा एक दूसरे से करके अपने परिवार की शुरुवात करते हैं। पर इस खूबसूरत रिश्ते के साथ एक प्राचीन बुराई भी साथ चली आ रही है जो समाज के लिए अभिशाप है। दहेज प्रथा जिसकी शुरुआत कब हुई कोई नहीं जानता पर आज इसकी जड़ें इतनी ज्यादा फैल चुकी हैं कि ये खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही।

शादी के वक्त लड़की के पिता द्वारा लड़के को गाड़ी, घर का सामान, या कुछ अन्य कीमती वस्तुएं देने की प्रथा को ही दहेज प्रथा कहा जाता है। आज कल शादियों में सिर्फ दिखावे के लिए लाखों करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा दिया जाता है सिर्फ उन लोगों को दिखाने के लिए जो हमारी खुशी से खुश भी नहीं हैं और इस सब का अशर लड़की के पिता की जेब पर पड़ता है। हर किसी का इतना सामर्थ नहीं होता कि वह लड़के वालों की सभी मांगों को पूरा करे परंतु अपनी बेटी के अच्छे ओर सुखी वैवाहिक जीवन के लिए, एक पिता कहीं से कर्ज लेकर दहेज देता है। क्योंकि समाज में आज भी कुछ ऐसे इंसान मौजूद हैं जो दहेज न मिलने पर अपनी पत्नी पर अत्याचार करते हैं। सरकार ने दहेज प्रथा को रोकने के लिए कानून भी बनाए पर इस प्रथा की जड़ों को नहीं हिला पाई। लोगों ने मांगने के लिए इसका नाम दहेज की वजह तोहफे रख दिया जिससे मांगने में शर्म न आए।
आज तो लड़कियां अपनी जिंदगी आजादी के साथ जी रही हैं, उन्हें पूर्ण शिक्षा भी मिलती है वो चाहे तो एक अच्छी नौकरी करके आत्मनिर्भर बन सकती हैं। फिर क्या वजह है कि आज भी लोग दहेज दे रहे हैं?
लोगों की बढ़ती लालच के कारण आज न जाने कितने लोग गलत इंसान के साथ रिश्ते में हैं। जहां विचार और अच्छे संस्कार को देखना चाहिए वहां लोग लड़के में उसकी कमाई, जमीन और सिर्फ पैसा देखते हैं और लड़की के घर से मिलने वाले तोहफे ही उसको शादी के योग्य बनाता है। यही वजह है कि आज शादियां बहुत कम चलती हैं और होने वाले तलाकों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। अगर समाज को दहेज जैसी प्रथा को खत्म करना है तो हमें कठोर कानून के साथ साथ अपनी सोच में बदलाव लाने की जरूरत है। हमें ये मानना होगी कि जरूरी नहीं ज्यादा कमाने वाला आपकी बेटी को खुश रखेगा या ज्यादा दहेज लेकर आने वाली लड़की अपना पत्नी धर्म अच्छे से निभाएगी।

पैसा हमें कुछ हद तक खुशियां दे सकता है पर वो हमारे जीवन में सुकून की वजह नहीं बन सकता। इसलिए बेहतर होगा कि हम पैसों के पीछे न भागकर अच्छे इंसान को चुने जो तोहफे के रूप में खुशियां लेकर आए।



























