Home जनमुद्दे बिहार का भरत पूरे भारत को जगा और रूला गया

बिहार का भरत पूरे भारत को जगा और रूला गया

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मैं अपनों पर हाथ नहीं उठा सकता कहने वाला भ्रष्टाचार की जंग में शहीद

आरा/ साहपुर। धर्म हिन्दू, नाम भरत भूषण तिवारी। ना कोई क्रिमिनल हिस्ट्री, ना आपराधिक पृष्ठभूमि। फिर भी 17 जून को पुलिस की गोली का शिकार। क्यों? क्योंकि वो जात-पात से ऊपर उठकर बिहार में कैंसर बन चुके भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर था।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में भरत ने खुद साफ कहा था, “मैं अपने लोगों पर हाथ नहीं उठा सकता।” लोगों का कहना है कि भले उसने बन्दूक उठाई, पर मकसद सिर्फ सिस्टम में घुसे भ्रष्टाचार को मिटाना था। वो लगातार कहता था कि जो वादे नेता करते हैं उन्हें पूरा करना चाहिए। नेताओं को जाति से ऊपर उठकर विकास कार्य करने चाहिए। उसी जंग में उसने जान न्योछावर कर दी।

बहुचर्चित भोजपुर बिलौटी मुठभेड़ मामले में अब नया मोड़ आया है। मृतक की मां आशा देवी के आवेदन पर 22 जून 2026 को शाहपुर थाने में जगदीशपुर एसडीपीओ राजेश शर्मा, निलंबित थानाध्यक्ष राजेश मालाकार समेत अन्य पुलिसकर्मियों पर हत्या का केस दर्ज हुआ है। कांड संख्या 178/26 में बीएनएस की धारा 103(1)(5) और 27 आर्म्स एक्ट लगाया गया है।

मां का आरोप है कि एसडीपीओ के आदेश पर भरत को धक्का देकर गिराया गया और पांच गोलियां मारी गईं। वहीं पुलिस का दावा है कि 17 जून को एसटीएफ के साथ घर पहुंची टीम पर भरत ने फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में गोली लगी और पीएमसीएच में मौत हो गई।
लोगों का कहना है कि भरत भूषण तिवारी जवइनिया बाढ़ कटाव पीड़ितों की आवाज था। वो सिस्टम से यह सवाल कर रहा था कि बाढ़ प्रभावित लोगों की सुध क्यों नहीं ली जा रही। आरोप है कि सिस्टम को यही बात न गुजरी। वो हर जाति को साथ लेकर चलता था, पिछड़ों की बात करता था। सोशल मीडिया पर लाइव आकर सिस्टम की पोल खोलता था। आरोप है कि इसी मुखरता के कारण पहले उसे मानसिक रोगी बताया गया, फिर इनकाउंटर कर दिया गया।

सिस्टम पर सवाल, जनता एकजुट

  1. निष्पक्ष जांच की मांग: हजारों लोग भरत के लिए न्याय मांग रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि एक निहत्थे पर पुलिस गोलियां कैसे चला सकती है। लोग पूछ रहे हैं कि भ्रष्टाचार कब और कैसे खत्म होगा।
  2. जाति की दीवार टूटी: भरत चाहता था कि हर वर्ग एकजुट होकर आवाज उठाए। आज बिहार में वही दिख रहा है। हर जाति के लोग एक मंच पर आकर भरत के लिए न्याय और भ्रष्टाचार खत्म करने की मांग कर रहे हैं।
  3. देश को नसीहत: लोगों का कहना है कि भरत की सोच पूरे देश को जाति में ना बंटकर एकजुट होकर भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने की नसीहत दे गई।

आरा-बिहार के लोग भरत को शहीद का दर्जा दे रहे हैं। देशभर से लोग आरा पहुंच रहे हैं। नारे लग रहे हैं, “शहीद भरत भूषण तिवारी अमर रहे”। लोगों का कहना है कि राजनेता चुनाव में बड़े वादे करते हैं, जीतते ही जातिगत समीकरण में उलझ जाते हैं। यहीं से भ्रष्टाचार की पहली सीढ़ी शुरू होती है। भरत इसी का विरोध कर रहा था। भोजपुर पुलिस ने इंस्पेक्टर संजीव कुमार को अनुसंधानकर्ता बनाया है। राज्य सरकार ने न्यायिक जांच आयोग गठित करने का फैसला किया है।

बिहार का भरत पूरे भारत को जगा और रूला गया। वो कहता था, “मैं अपनों पर गोली नहीं चला सकता”। आज उसी की सोच पर हर जाति के लोग एकजुट हैं। अब देखना है कि सिस्टम जनता की आवाज सुनता है या फिर वही पुराना रवैया रहता है। क्योंकि लड़ाई सिर्फ एक है, सिस्टम में जड़े जमा चुके भ्रष्टाचार के खिलाफ। यही तो भरत चाहता था। आखिरकार भरत भूषण तिवारी की मौत सिस्टम पर ही सवाल खड़े कर गयी।

जहां हुआ इनकाउंटर, वहीं बन रहा शहीद स्मारक

बिहार के आरा में भरत तिवारी का स्मारक बनाने के लिए ईंट रखी गई है। जिस जगह उनका एनकाउंटर हुआ था, वहीं स्मारक बनाने की मांग उठी है। स्थानीय संगठनों और शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप ने मिलकर गांव के एक व्यक्ति से ईंट रखवाकर स्मारक निर्माण की आवाज उठाई है। ये मामला अब तूल पकड़ लिया है और स्थानीय लोग स्मारक के लिए एकजुट हो रहे हैं और भरत भूषण तिवारी के नाम पर लोग भावनात्मक रूप से जुड़ रहे हैं।