हल्द्वानी। कांग्रेस महानगर अध्यक्ष मधु सांगुडी ने कहा कि उत्तराखंड में महिला अपराध में गंभीर घटनाएं और पहाड़ी इलाकों की खास चुनौतियां अब भी चिंता का विषय बनी हुई हैं। पिछले 5 सालों में 10,500 महिलाएं और बालिकाएं लापता हुईं, जिनमें से 757 अभी भी नहीं मिलीं। सिर्फ 2024 में 1953 महिलाएं और 838 बालिकाएं गुमशुदा हुईं। सबसे ज्यादा गंभीर महिला अपराध हरिद्वार, उधमसिंह नगर और देहरादून में दर्ज हुए। वहीं चंपावत में 2023 में 9 दुष्कर्म और 12 अपहरण के मामले थे। एन.सी.आर.बी. के आंकड़े और जमीनी हकीकत में बड़ा फासला है।
चंपावत में 5 मई 2026 की रात 16 साल की नाबालिग छात्रा के साथ हुए गैंगरेप की घटना ने पूरे उत्तराखंड को हिला कर रख दिया है। ये मामला मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विधानसभा क्षेत्र का है। इस घटना पर कांग्रेस महानगर अध्यक्ष मधु सांगुड़ी ने दुःख जताते हुए सरकार को घेरा है। उनका कहना है कि जब मुख्यमंत्री के अपने विधानसभा क्षेत्र में ही महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं, ऐसे में पूरे प्रदेश की स्थिति और गंभीर हो जाती है। सरकार का महिला सशक्तिकरण सिर्फ दिखावे तक सीमित है। उन्होंने कहा कि ये सिर्फ एक बेटी पर अत्याचार नहीं बल्कि कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल है, और जब सत्ता से जुड़े लोग आरोपित हों तो माताएं-बहनें किस पर भरोसा करें। ये मामला सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा और सत्ता के दुरुपयोग के सवालों को भी उठा रहा है। आज भी डर, सामाजिक दबाव और पुलिस पर भरोसे की कमी के कारण कई मामले दर्ज ही नहीं होते। पहाड़ी इलाकों में पुलिस स्टेशन दूर हैं, रात में गश्त और लाइटिंग कम है। चंपावत जैसी घटना में भी स्थानीय लोगों ने देर रात तलाशी अभियान चलाकर पीड़िता को बचाया। जब आरोपी सत्ता से जुड़े हों तो निष्पक्ष जांच पर सवाल उठते हैं, जिससे पीड़ित का भरोसा टूटता है। चंपावत जैसी घटनाएं दिखाती हैं कि जमीनी सुरक्षा और भरोसा अभी कमजोर है। आंकड़े घटाना एक बात है, और एक महिला को रात में अकेले चलने का भरोसा देना दूसरी बात।



























