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बेजुबानों का मसीहा, वन्देमातरम ग्रुप

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हल्द्वानी। गर्मी में प्यासे पशु-पक्षियों के लिए प्याऊ की व्यवस्था करना वाकई पुण्य का काम है। पानी के बिना ये बेजुबान कुछ बोल भी नहीं पाते, ऐसे में ये पहल उनके लिए जीवनदान जैसी है। वन्देमातरम ग्रुप के सहयोग से समय-समय पर निरीक्षण करके ये सुनिश्चित करना कि प्याऊ में पानी भरा रहे और साफ-सफाई बनी रहे, इस सेवा को और भी सार्थक बना देता है। टीमवर्क से ही ऐसे काम लंबे समय तक चलते हैं। वाकई ऐसे प्रयास समाज के लिए मिसाल हैं। वंदे मातरम ग्रुप की प्याऊ सेवा के शैलेन्द्र सिंह दानू इन दिनों बेजूबानो को पानी पिलाने की मुहिम में जुटे हुए हैं, यह कार्य वह काफी लम्बे समय से कर रहे हैं। वैसे तो आमतौर पर “जुबा वालों को 56 भोग खिला कर पुण्य कमाने से बेहतर किसी बेजुबा की जल सेवा करना सबसे बड़ा कर्म है यह दिखावे के दान से ज्यादा जरूरी है प्यासे जीवों की सेवा।” वैसे तो गर्मी में घर के बाहर या छत पर एक कटोरा पानी रख देना भी सबसे बड़ा धर्म है। बेजुबान जानवर बोलकर मांग नहीं सकते, इसलिए उनकी जल सेवा सीधे ईश्वर तक पहुंचती है।

वंदे मातरम ग्रुप का प्याऊ सेवा का काम वाकई सराहनीय है। इस संस्था द्वारा गर्मी में जगह-जगह बेजुबान जानवरों के लिए पानी की व्यवस्था की गयी है।