Home उत्तराखंड गाद और प्लास्टिक से भर रही कुमाऊँ की शान

गाद और प्लास्टिक से भर रही कुमाऊँ की शान

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28 साल से नहीं हुई झील की सफाई

भीमताल। मानसून आते ही भीमताल झील की स्वच्छता व्यवस्था की पोल खुल गई है। झील के किनारे गाद, प्लास्टिक की थैलियां, बोतलें और अन्य कूड़ा-कचरा जमा हो गया है। पानी का रंग भी मटमैला पड़ गया है। स्थानीय लोगों और पर्यटकों में इसको लेकर गहरी नाराजगी है। उनका आरोप है कि नगर पालिका और सिंचाई विभाग की अनदेखी के कारण हर साल बरसात में शहर का कचरा सीधे झील में चला जाता है।

सामाजिक कार्यकर्ता पूरन चंद्र बृजवासी ने कहा, “हर साल मानसून से पहले नालियों की सफाई और झील में गिरने वाले नालों पर जाली लगाने के वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत शून्य है। नगर पालिका का कचरा और बाजार का गंदा पानी बिना ट्रीटमेंट के सीधे झील में जा रहा है। सिंचाई विभाग भी गाद निकालने में लापरवाह है।”

स्थानीय लोगों के अनुसार, झील से 3 किमी दूर हेड से शहर के बीचों-बीच होते हुए झील किनारे ट्रेल तक ड्रेन के जरिए गाद और कचरा बहकर आता है। इससे झील की गहराई लगातार कम हो रही है। 1998 के बाद से अब तक झील की गाद निकासी का कोई बड़ा काम नहीं हुआ है। इसका असर न सिर्फ झील के सौंदर्य पर पड़ रहा है, बल्कि जलीय जीवन और पर्यटन पर भी बुरा असर पड़ रहा है।‌ वहीं बृजवासी ने इस पर जिला प्रशासन, नगर पालिका और सिंचाई विभाग से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि झील की तुरंत सफाई कर कचरा और गाद हटाई जाए, शहर के नालों पर स्थाई जाली और ट्रैप लगाए जाएं, मानसून से पहले झील संरक्षण की विशेष कार्ययोजना बनाकर उसे लागू किया जाए। उन्होंने कहा, “भीमताल झील कुमाऊँ की पहचान है। इसे कूड़ेदान बनने से बचाकर संरक्षित किया जाना चाहिए।”