Home उत्तराखंड आरटीआई कार्यकर्ता व समाजसेवी हेमंत गौनिया को जानलेवा खतरा

आरटीआई कार्यकर्ता व समाजसेवी हेमंत गौनिया को जानलेवा खतरा

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मुख्यमंत्री कार्यालय ने लिया संज्ञान, सुरक्षा के निर्देश जारी

हल्द्वानी। आर.टी.आई. कार्यकर्ता एवं समाजसेवी हेमंत सिंह गौनिया को मिल रही लगातार जानलेवा धमकियों और हमलों के मामले में उत्तराखंड शासन ने गंभीर संज्ञान लिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय, देहरादून में दिए गए प्रार्थना पत्र के आधार पर मामले को अनुसूची अनुभाग-2 में दर्ज किया गया है। हेमन्त डौंडिया ने बताया कि अनुसूची अनुभाग-2 के अनुभागाधिकारी गोकर्ण सिंह रावत द्वारा पत्र पर विधिवत कार्रवाई करते हुए इसे संबंधित विभागों को प्रेषित किया गया है। पत्र संख्या G-35/6/XXXV-2/2026 दिनांक 04/2026 के तहत प्रकरण को गंभीर श्रेणी में लेते हुए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं। पत्र के अनुसार मामला अब स्थानीय प्रशासन, पुलिस विभाग एवं सुरक्षा एजेंसियों को भेज दिया गया है जहां से आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जानी है। हेमंत सिंह गौनिया ने अपने प्रार्थना पत्र में स्पष्ट किया है कि वे लंबे समय से भू-माफिया, खनन माफिया, शराब माफिया, अवैध कब्जाधारियों, भ्रष्ट अधिकारियों एवं ठेकेदारों के खिलाफ लगातार आरटीआई के माध्यम से लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके जनहित कार्यों के कारण कई आपराधिक एवं असामाजिक तत्व उनके विरोध में सक्रिय हो गए हैं। पत्र में उल्लेख किया गया है कि उनके घर पर कई बार पत्थरबाजी की गई। उन्हें वाहन से टक्कर मारने का प्रयास किया गया। फोन के माध्यम से जान से मारने की धमकियां दी गईं। अज्ञात व्यक्तियों द्वारा उनका पीछा किए जाने की घटनाएं भी सामने आईं।
उनके विरुद्ध फर्जी शिकायतें शासन-प्रशासन में भेजी जा रही हैं। कई बार पुलिस को अवगत कराने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। पत्रों में यह भी उल्लेख किया गया है कि हेमंत गौनिया एक सक्रिय समाजसेवी के रूप में लगातार जनसेवा में लगे हुए हैं। वे हर वर्ष लगभग 40 से 50 लाख रुपये मूल्य की सामग्री गरीबों की सहायता में प्रदान करते हैं। पिछले 2 वर्षों में उन्होंने 224 लावारिस शवों का सम्मानजनक अंतिम संस्कार कराया है। उत्तराखंड आपदा के समय उन्होंने 11 ट्रक राहत सामग्री भेजी। दवाइयां, खाद्यान्न, कपड़े और आवश्यक वस्तुएं जरूरतमंदों तक पहुंचाने में उनकी अग्रणी भूमिका रही है। कोविड-19 महामारी के दौरान लगभग 3 वर्षों तक उन्होंने अपनी मशीनों से लगातार सेनीटाइजेशन का कार्य किया। डेंगू और मलेरिया जैसी घातक बीमारियों के समय भी उन्होंने अपनी मशीनों के माध्यम से लोगों की सेवा की। वे लगातार जनहित में विकास कार्य कराते आ रहे हैं और समाज की सेवा में समर्पित हैं। पत्र के अनुसार उनकी लोकप्रियता केवल उत्तराखंड तक सीमित नहीं है बल्कि देश के विभिन्न राज्यों में भी लोग उनकी समाजसेवा से जुड़े हुए हैं। राष्ट्रीय समाचार पत्रों और टीवी चैनलों द्वारा उनके कार्यों को लगातार प्रकाशित और प्रसारित किया जाता रहा है। इसी बढ़ती लोकप्रियता और जनसमर्थन के कारण कुछ असामाजिक तत्वों को यह स्वीकार नहीं हो रहा है।
पत्र में उल्लेख है कि ऐसे तत्व लगातार उनकी छवि धूमिल करने और उन्हें बदनाम करने के प्रयास में लगे हुए हैं। हालांकि उनके प्रयास सफल नहीं हो पा रहे हैं जिससे वे और अधिक परेशान हैं। पत्र में आरटीआई कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार के दिशा-निर्देश, व्हिसलब्लोअर प्रोटेक्शन एक्ट 2014 तथा उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों के निर्देशों का भी उल्लेख किया गया है।‌ जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि सूचना मांगने वाले एवं भ्रष्टाचार उजागर करने वाले व्यक्तियों को खतरे की स्थिति में तत्काल सुरक्षा प्रदान करना राज्य की जिम्मेदारी है। हेमंत सिंह गौनिया ने शासन से मांग की है कि उन्हें 24 घंटे पुलिस सुरक्षा (PSO/गनर) उपलब्ध कराई जाए, साथ ही उनके घर एवं जनसेवा केंद्र पर नियमित पुलिस गश्त लगाई जाए।
अब तक हुई सभी घटनाओं की विशेष टीम द्वारा निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। भू-माफिया, खनन माफिया, शराब माफिया, ठेकेदारों एवं भ्रष्ट अधिकारियों पर कड़ी निगरानी रखते हुए आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उनकी शिकायतों को शासन स्तर पर “अत्यंत संवेदनशील श्रेणी” में लिया जाए। शासन स्तर से निर्देश जारी होने के बाद अब निगाहें स्थानीय पुलिस एवं जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वे कितनी शीघ्रता से कार्रवाई करते हैं।और एक सक्रिय आरटीआई कार्यकर्ता एवं समाजसेवी की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए न्याय दिलाने का कार्य करते हैं।