श्रेय लेने की होड़, सवाल राष्ट्रीय दलों ने क्या दिया ?
बागेश्वर/कपकोट। ग्राम पंचायत सुमटी, विधानसभा क्षेत्र कपकोट की होनहार बेटी कुमारी प्रेमा रावत का भारतीय महिला क्रिकेट टीम में चयन होना पूरे कपकोट, बागेश्वर जनपद और उत्तराखंड के लिए गौरव का क्षण है। सीमित संसाधनों, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और संघर्षों के बीच प्रेमा ने अपने अटूट आत्मविश्वास, कठोर परिश्रम और अनुशासन से यह ऐतिहासिक मुकाम हासिल किया है। यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार और क्षेत्र का मान बढ़ाती है, बल्कि पहाड़ की हर बेटी के सपनों को नई उड़ान देती है। सरकार की नीतियों और पलायन का दर्द भी वो बख़ूबी समझती है।
प्रेमा ने साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प हो तो पहाड़ की बेटियाँ भी देश-दुनिया में उत्तराखंड का नाम रोशन कर सकती हैं। कपकोट अपनी इस बेटी पर गर्व करता है। उनकी यह सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का प्रकाशस्तंभ बनेगी।
लेकिन सवाल यहीं खत्म नहीं होते आज जब पहाड़ की बेटियाँ देश का नाम रोशन कर रही हैं, तब यह सोचना भी जरूरी है कि आखिर कितनी प्रेमा रावत संसाधनों के अभाव में अपने सपनों को बीच में ही छोड़ देती हैं?
पहाड़ से लगातार हो रहा पलायन प्रतिभाओं को भी ले जा रहा है। गाँवों में खेल मैदान नहीं, कोच नहीं, सुविधा नहीं। राष्ट्रीय दलों की सरकार बताए कि पलायन रोकने के लिए खेल नीति जमीन पर क्यों नहीं उतरी। घोषणाएँ तो बहुत हुईं, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में स्टेडियम, स्पोर्ट्स हॉस्टल और प्रतिभा खोज अभियान कहाँ हैं? बेटियों को प्रोत्साहन देने के लिए बजट का कितना हिस्सा पहाड़ तक पहुँच रहा है? सरकार हर ब्लॉक में मिनी स्टेडियम, बालिका खिलाड़ियों के लिए विशेष छात्रवृत्ति और कपकोट-बागेश्वर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में कोचिंग सेंटर की व्यवस्था क्यों नहीं करती?

यूकेडी नेता सीए वरूण चन्दोला ने कहा कि प्रेमा रावत को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ और सरकार में आने पर पहाड़ की प्रतिभाओं के पलायन को रोकने के लिए ठोस नीति बनाऊंगा।































