नेहा खत्री (जयपुर, राजस्थान)
मुश्किलें चाहे कितनी भी क्यों न सामने आकर खड़ी हो जाएँ…,
रास्ते चाहे काँटों से भरे हों…,
और जीवन का सफ़र कभी-कभी इतना तन्हा लगे कि साथ चलने वाला कोई अपना भी न दिखाई दे, फिर भी अपने मन की रोशनी को बुझने मत देना…
हर परिस्थिति में अपने अधरों पर मुस्कान सजाए रखना…,
क्योंकि मुस्कान केवल चेहरे की सुंदरता नहीं,
बल्कि भीतर बसे साहस, धैर्य और आत्मविश्वास की पहचान होती है…,
जीवन में ठोकरें आएँगी, लोग साथ छोड़ेंगे…
कभी परिस्थितियाँ तुम्हें कमजोर बनाने का प्रयास करेंगी…
पर तुम्हारे भीतर अपनी मंज़िल तक पहुँचने की जो सच्ची तलब,
जो अटूट चाह और निरंतर आगे बढ़ने का जुनून है…,
उसे कभी कम मत होने देना…,
क्योंकि वही तलब इंसान को गिरकर फिर उठना सिखाती है,
अंधेरों में भी उम्मीद का दीप जलाए रखती है…,
और अंततः उसे उसकी मंज़िल तक पहुँचा देती है…।



























