Home उत्तराखंड द म्यूजिकल विलेज पोखरी फेस्ट 2026 धूमधाम से सम्पन्न

द म्यूजिकल विलेज पोखरी फेस्ट 2026 धूमधाम से सम्पन्न

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बागेश्वर । द म्यूजियम विलेज पोखरी फेस्ट का आज 25 मई 2026 को बागेश्वर जिले की ग्राम सभा पोखरी, विजयपुर, तहसील कांडा में विधिवत शुभारंभ किया गया। इस दौरान हजारों लोगों की भीड़ पहुंची और यूकेडी नेता आशीष नेगी भी शामिल हुए। सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक दिनभर कार्यक्रम चलते रहे।

आयोजक वरूण चन्दोला, जो उत्तराखंड क्रांति दल के कर्मठ कार्यकर्ता और कपकोट विधानसभा क्षेत्र से संभावित विधायक प्रत्याशी हैं उन्होंने बताया कि “एक दिन, एक गांव, एक जश्न” स्थानीय संगीत, संस्कृति और एकता का संगम है। इस कार्यक्रम में लाइव म्यूजिक परफॉर्मेंस और बड़े कलाकारों की प्रस्तुति भी दी गयी। वहीं स्थानीय खानपान व हस्तशिल्प के स्टॉल भी लगाए गये। ग्रामीण सहभागिता यानि गांव वालों की एक्टिव हिस्सेदारी भी देखने को मिली। सभी उम्र के लिए खेल व गतिविधियां भी आयोजित की गयी थी। आयोजक वरूण चन्दोला ने बताया कि ये फेस्ट पहाड़ी संस्कृति को प्रमोट करने और गांव को एक नई पहचान देने के लिए किया गया है। इस दौरान लोगों की भारी मौजूदगी और यूकेडी नेता आशीष नेगी की शिरकत से कार्यक्रम को राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों रंग मिले।

आशीष नेगी की भागीदारी ने कार्यक्रम में लगाए चार चांद

यूकेडी नेता आशीष नेगी ने सिर्फ शिरकत ही नहीं की, मंच पर अपनी प्रतिभा का जौहर भी दिखाया। उनकी मौजूदगी से युवाओं में खासा उत्साह दिखा। ग्रामीणों ने भी उनकी प्रस्तुति को खूब सराहा। यहां तक कि गांव के बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक ने अपने हुनर का परिचय दिया। किसी ने लोकगीत गाए, किसी ने पारंपरिक नृत्य किया, तो महिलाओं ने हस्तशिल्प और खानपान के स्टॉल लगाकर पहाड़ी संस्कृति की झलक दिखाई।
आशीष नेगी ने अपने सम्बोधन में कहां कि “एक दिन, एक गांव, एक जश्न” थीम पर हुआ ये आयोजन गांव को नई पहचान दे रहा है। सजे-धजे गांव में जब ढोल-दमाऊं की गूंज उठती है तो नजारा वाकई खूबसूरत होता है।

ऐसे सांस्कृतिक आयोजन पलायन कर चुके लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ते हैं। जब पुस्तैनी घर-आंगन में मेला लगता है, लोक संगीत बजता है, तो बाहर गए लोग भी एक बार गांव खिंचे चले आते हैं। वरूण चन्दोला का मकसद भी यही है पहाड़ी संस्कृति को प्रमोट करना और गांव को नई पहचान देना। वहीं आशीष नेगी ने कहा कि खेल, संगीत, खानपान और गतिविधियों में पूरे गांव की एक्टिव जो हिस्सेदारी देखने को मिली वह वास्तव में काबिलेतारिफ है, इससे आपसी मेलजोल और अपनापन बढ़ता है। ग्रामीण परिवेश में जब हजारों लोग जुटते हैं, अपनी कला दिखाते हैं और जश्न मनाते हैं तो वो सिर्फ कार्यक्रम नहीं रह जाता, गांव की आत्मा जाग उठती है।