साहित्य संस्थान द्वारा हल्द्वानी में भव्य पुस्तक विमोचन एवं कवि सम्मेलन आयोजित
हल्द्वानी। संपर्क साहित्य संस्थान (उत्तराखंड इकाई) के तत्वावधान में संस्था के अध्यक्ष अनिल लढ़ा एवं समन्वयक महासचिव रेनू शब्दमुखर के मार्गदर्शन एवं प्रेरणा से मातृ दिवस के अवसर पर नगर निगम सभागार, हल्द्वानी में भव्य पुस्तक विमोचन एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह आयोजन साहित्य, संवेदना, संस्कृति और मानवीय मूल्यों का अनुपम संगम बन गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि हल्द्वानी मेयर गजराज सिंह बिष्ट, विशिष्ट अतिथि प्रो. नवीन चंद्र लोहनी, कार्यक्रम अध्यक्ष शशि कुड़ियाल एवं उत्तराखंड प्रभारी ललिता कापड़ी के करकमलों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। “शगुन आखर” एवं वरिष्ठ साहित्यकार गीता मिश्रा द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना ने पूरे सभागार को साहित्यिक एवं आध्यात्मिक वातावरण से ओतप्रोत कर दिया। तत्पश्चात अतिथियों का शाल, मोमेंटो एवं संपर्क संस्थान के दुपट्टे से सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया।
इस अवसर पर साझा काव्य संग्रह “मौन से सृजन तक” तथा “श्रीमद्भगवद्गीता : कुमाऊँनी रूपांतरण-टीका” का भव्य विमोचन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न कवयित्रियों एवं रचनाकारों ने अपनी कविताओं के माध्यम से मातृत्व, स्त्री संवेदनाओं, सामाजिक चेतना एवं मानवीय मूल्यों को भावपूर्ण स्वर प्रदान किया।
वरिष्ठ साहित्यकार कृष्णानंद चंदोला ने अपनी कृति “श्रीमद्भगवद्गीता : कुमाऊँनी रूपांतरण-टीका” के विषय में कहा कि उनका उद्देश्य गीता के दिव्य संदेश को कुमाऊँनी भाषा के माध्यम से जनमानस तक पहुँचाना है, जिससे नई पीढ़ी अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़ी रहे।
मुख्य अतिथि मेयर गजराज सिंह बिष्ट ने संपर्क साहित्य संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि नवोदित रचनाकारों को मंच देना और उनकी रचनाओं को पुस्तक के माध्यम से समाज तक पहुँचाना अत्यंत सराहनीय एवं अतुलनीय कार्य है। उन्होंने कहा कि भारत में हर दिन मातृ-पितृ सम्मान की भावना जीवित रहती है तथा भारतीय संस्कृति को सुरक्षित रखने में महिलाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। अपने राजनीतिक अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति महिलाओं में निहित है। वृद्धाश्रमों की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने परिवार और संस्कारों को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया।
विशिष्ट अतिथि प्रो. नवीन चंद्र लोहानी ने कहा कि उत्तराखंड साहित्य और संस्कृति के स्तर पर अत्यंत समृद्ध प्रदेश है। उन्होंने रचनाकारों से स्वयं का आलोचक बनने, आवश्यक एवं सार्थक लेखन को ही प्रकाशित करने तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजग रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि साहित्य केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज निर्माण की सशक्त शक्ति भी है।
विशिष्ट अतिथि शाम वीर चातक ने अपने उद्बोधन में कहा कि “मौन से सृजन तक मानसिक दुख से मानसिक सुख की अद्भुत और दिव्य यात्रा है।” उन्होंने कहा कि रामायण केवल राम की कहानी नहीं, बल्कि सत्यनिष्ठा की कहानी है, वहीं भगवद्गीता मनुष्य को भावनात्मक रूप से उतना ही सशक्त बनाती है, जितना विज्ञान शरीर को सशक्त करता है।
विशिष्ट अतिथि गजेन्द्र बटोही (अविचल प्रकाशन) ने कहा कि मां की उपमा किसी से नहीं दी जा सकती, केवल उनका स्मरण और सम्मान किया जा सकता है। उन्होंने इन साहित्यिक संकलनों के निरंतर प्रकाशन को हिंदी साहित्य के उज्ज्वल भविष्य का संकेत बताया। साथ ही सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताते हुए बच्चों के सीमित एवं सकारात्मक उपयोग पर बल दिया।
उत्तराखंड भाषा संस्थान से जुड़े हेमंत सिंह ने लेखन यात्रा को निरंतर जारी रखने का आह्वान करते हुए रचनाकारों से कुमाऊँनी भाषा में अधिक लेखन करने की अपील की। वहीं वरिष्ठ साहित्यकार दामोदर जोशी ने कुमाऊँनी भाषा में उद्बोधन देते हुए कहा कि “मौन सबसे शक्तिशाली अभिव्यक्ति है।”
मातृ दिवस के अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन में दामोदर जोशी ‘देवान्शु’, गोविंद बहुगुणा, डॉ. भगवती पनेरु, हेमा जोशी ‘परू’, अमृता पांडे, बीना भट्ट, बीना फुलेरा, प्रतिभा पांडे सहित अनेक रचनाकारों ने भावपूर्ण काव्य पाठ प्रस्तुत किया। कविताओं में मातृत्व, संवेदनाओं, समाज, संस्कृति एवं मानवीय मूल्यों की सुंदर अभिव्यक्ति देखने को मिली, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।
इस गरिमामयी समारोह में सभी नवोदित रचनाकारों को संपर्क संस्थान का दुपट्टा ओढ़ाकर, प्रशस्ति प्रमाणपत्र एवं पुस्तकें भेंट कर सम्मानित किया गया। वहीं उपस्थित सभी वरिष्ठ अतिथियों, साहित्यकारों एवं विशिष्ट जनों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर आदरपूर्वक सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह ने आयोजन को और अधिक आत्मीय, प्रेरणादायी एवं गरिमामय बना दिया।
कार्यक्रम का प्रभावी एवं गरिमामयी संचालन संपर्क साहित्य संस्थान की मानद सचिव मीना जोशी द्वारा किया गया। कार्यक्रम में देहरादून से वरिष्ठ साहित्यकार गीता जुयाल की गरिमामयी उपस्थिति भी रही।
अंत में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं संपर्क साहित्य संस्थान की सहसचिव शशि कुड़ियाल ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि “मौन से सृजन तक” जैसे संकलनों ने अनेक नवोदित रचनाकारों के अनकहे भावों को स्वर दिया है। मां पर लिखना “सूरज को दिया दिखाने” जैसा है, क्योंकि मां स्वयं जीवन की सबसे बड़ी शक्ति और प्रेरणा है। उन्होंने कहा कि संपर्क साहित्य संस्थान केवल साहित्य ही नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकारों में भी निरंतर अग्रणी भूमिका निभा रहा है। साथ ही उन्होंने बताया कि कुछ अपरिहार्य कारणों से संस्था के अध्यक्ष अनिल लढ़ा कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके, किंतु उन्होंने अपनी शुभकामनाएँ प्रेषित कीं।
कार्यक्रम के अंत में उत्तराखंड प्रभारी ललिता कापड़ी द्वारा सभी अतिथियों, साहित्यकारों एवं उपस्थित जनों का आभार व्यक्त किया गया। संपर्क संस्थान उत्तराखंड इकाई की ओर से चंपा पाठक, ऊषा पलड़िया, दिया, अरुणा, वैदेही कापड़ी एवं सागर ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।
अंत में राष्ट्रगीत “वन्दे मातरम्” के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। समारोह से यह संदेश दिया गया कि “शब्दों का यह कारवां यूँ ही चलता रहेगा, क्योंकि साहित्य समाज की उन्नति, संवेदनाओं और मानवीय मूल्यों के संरक्षण की सबसे सशक्त धुरी है।”



























