Home उत्तराखंड सीएम के उद्घाटन वाले अस्पताल में मौत, सुशीला तिवारी अस्पताल बदहाल

सीएम के उद्घाटन वाले अस्पताल में मौत, सुशीला तिवारी अस्पताल बदहाल

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हल्द्वानी के पीएसपी अस्पताल पर फिर उठे सवाल, सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी बहस तेज

हल्द्वानी शहर में तेजी से खुल रहे निजी अस्पतालों की स्वास्थ्य सुविधाओं और उपचार व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। रामपुर रोड स्थित पीएसपी हॉस्पिटल में उपचार के दौरान 65 वर्षीय मरीज प्रेम गिरी की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनाव का माहौल बन गया और परिजनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
जानकारी के अनुसार बागेश्वर जनपद के मंडलसेरा निवासी प्रेम गिरी पुत्र शिव गिरी को उपचार के लिए पीएसपी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ गई और बाद में उनकी मौत हो गई। परिजनों में गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि उपचार प्रक्रिया और मरीज की स्थिति के संबंध में उन्हें पर्याप्त जानकारी नहीं दी

गौरतलब है कि हाल के दिनों में निजी अस्पतालों में उपचार के दौरान मरीजों की मौत के कुछ मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आधुनिक सुविधाओं और बेहतर उपचार के दावों के बीच मरीजों और परिजनों को कई बार गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

विशेष बात यह है कि जिस पीएसपी हॉस्पिटल में यह घटना हुई है, उसका उद्घाटन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने किया था। उद्घाटन के दौरान नैनीताल सांसद अजय भट्ट, महाराष्ट्र के पूर्व राज्यपाल व पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी सहित भाजपा के कई बड़े नेता मौजूद थे। इस भव्य आयोजन ने नई बहस को जन्म दे दिया है। इसी अस्पताल से महज कुछ कदमों की दूरी पर स्थित सरकारी डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल संकटों से जूझ रहा है। यहां कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन की लड़ाई लड़नी पड़ रही है। अस्पताल में संसाधनों की भारी कमी के साथ डॉक्टरों की किल्लत है, और मरीजों की बढ़ती भीड़ ने व्यवस्थाओं को चरमरा कर रख दिया है। यह सरकारी अस्पताल न केवल उत्तराखंड बल्कि उत्तर प्रदेश के मरीजों को भी इलाज प्रदान करता था, अब बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहा है। स्थानीय लोगों का सवाल है कि क्या सरकार सरकारी स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के बजाय निजीकरण को बढ़ावा दे रही है? क्या सरकारी अस्पतालों, स्कूलों और कॉलेजों को जानबूझकर कमजोर किया जा रहा है ताकि निजी संस्थानों को आगे बढ़ने का मौका मिले?

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दौरे अक्सर निजी संस्थानों के उद्घाटन या निजी कार्यक्रमों में शिरकत तक सीमित रहते हैं, और इन आयोजनों का खर्च सरकारी खजाने से चलता है। यह विरोधाभास सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल प्रेम गिरी की मौत के वास्तविक कारणों को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मामले में अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। जनता के बीच चर्चा है: जब अपने ही दामन झटक कर चल दिए, तो गैरों से क्या गिला। सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर निजीकरण का कहर साफ दिखने लगा है। यह अराजकता आज के दौर की सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है।