वनाग्नि रोकथाम को लेकर सामुदायिक स्तर पर बड़े फैस
चौखुटिया । विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून के अवसर पर आयोजित “हिमालय आपातकाल बैठक” सफलतापूर्वक संपन्न हुई। बैठक में हिमालयी क्षेत्र में बढ़ती वनाग्नि, जल स्रोतों के सूखने और जैव विविधता के नुकसान जैसे गंभीर मुद्दों पर गहन चर्चा की गई।

विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिभागियों ने जंगल की आग और हिमालय की बिगड़ती स्थिति पर चिंता जताते हुए ठोस सुझाव रखे। विचार-विमर्श के बाद सामुदायिक स्तर पर निम्न निर्णय लिए गए –
- हिमालय समुदाय संघ का गठन : गांव-गांव में लोगों को जोड़कर वनाग्नि की रोकथाम और निगरानी के लिए जल्द ही “हिमालय समुदाय संघ” बनाया जाएगा।
- मॉडल ग्राम चयन : चौखुटिया क्षेत्र के महतगांव को मॉडल ग्राम चुना गया है, जहां सामुदायिक भागीदारी से वनाग्नि मुक्त गांव का मॉडल विकसित कर अन्य गांवों में लागू किया जाएगा।
- सरकार से मांगें : संघ के माध्यम से सरकार के सामने प्रस्ताव रखा जाएगा जिसमें शामिल हैं –
- अक्टूबर से जून तक प्रत्येक पंचायत में 3-5 फायर वाचर की नियुक्ति।
- गांव के 2 किमी दायरे में पिरूल-सूखी घास की नियमित सफाई।
- वन निगरानी के लिए ड्रोन और सेंसर टावर।
- पिरूल-घास से उत्पाद बनाकर रोजगार सृजन।
- आग लगाने वालों पर नजर रखने के लिए विशेष दल और व्यापक जनजागरूकता अभियान।
वहीं बैठक में ग्रामीणों ने निर्णय लिया कि गांव में वनाग्नि रोकथाम और त्वरित प्रतिक्रिया के लिए स्थानीय टीमें बनाई जाएंगी।

बैठक का निष्कर्ष रहा कि हिमालय को बचाने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, समाज के हर नागरिक की है। आयोजकों ने लोगों से अपील की है कि यदि उनके पास और सुझाव हैं तो वे कमेंट करें ताकि उन्हें भी अमल में लाया जा सके।





























