बागेश्वर । उत्तराखंड विधानसभा चुनाव 2022 के दौरान कपकोट विधानसभा क्षेत्र में किए गए एक वादे को लेकर अब राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक पोस्टर में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से पूछा गया है कि “2022 के वादे का क्या हुआ?” 27 जनवरी 2022 को प्रकाशित हिंदुस्तान की एक खबर का हवाला देते हुए पोस्टर में कहा गया है कि भाजपा से टिकट न मिलने से नाराज चल रहे पूर्व विधायक शेर सिंह गढ़िया को मनाने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी 28 जनवरी 2022 को कपकोट पहुंचने वाले थे। उस समय भाजपा ने कपकोट से मौजूदा विधायक बलवंत सिंह भौर्याल का टिकट काटकर शेर सिंह गढ़िया को उम्मीदवार बनाया था। लेकिन बाद में पार्टी ने फैसला बदलकर सुरेश सिंह गढ़िया को टिकट दिया। सुरेश सिंह गढ़िया ने 2022 का चुनाव जीतकर कपकोट से विधायक पद संभाला।
वायरल पोस्टर में “जनता पूछ रही है” शीर्षक के तहत कई सवाल खड़े किए गए हैं जिसमें कहां गया है कि क्या शेर सिंह गढ़िया को मनाया गया?, क्या उन्हें उनका सम्मान मिला?, क्या 2022 के वादे पूरे हुए या सिर्फ राजनीति हुई?, कपकोट की जनता को न्याय कब मिलेगा?
पोस्टर के अंत में बड़े अक्षरों में लिखा है – “वादे नहीं, हकीकत चाहिए!” लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मार्च 2025 में अपने 3 साल पूरे होने पर कहा था कि भाजपा के 2022 के विजन डॉक्यूमेंट में किए गए वादों में से 70 प्रतिशत से अधिक वादे पूरे किए जा चुके हैं और शेष वादे भी अगले चुनाव से पहले पूरे कर लिए जाएंगे। कपकोट क्षेत्र में इस पोस्टर के सामने आने के बाद स्थानीय राजनीति गरमा गई है। अब देखना होगा कि भाजपा नेतृत्व इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या शेर सिंह गढ़िया को लेकर कोई नया निर्णय लिया जाता है। लेकिन इतना तो तय है भाजपा पार्टी किसी को भी अपना उम्मीदवार घोषित करें वह जनता के विकास से पहले अपना और अपनी पार्टी के विकास पर ज्यादा ध्यान देने वाला ही होगा। इसका सबसे बड़ा उदाहरण पूर्व सीएम, पूर्व राज्यपाल रह चुके भगत सिंह कोश्यारी के रूप में देखने को मिलता है।





























