Home उत्तराखंड क्या अब बनेगा भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग के लिए मजबूत लोकायुक्त

क्या अब बनेगा भ्रष्टाचार के खिलाफ जंग के लिए मजबूत लोकायुक्त

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उत्तराखंड अपने आप में एक छोटा राज्य है, लेकिन सवाल बहुत बड़ा। क्या सच में यहां की सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ना चाहती है, या फिर ये लड़ाई सिर्फ भाषणों तक सीमित है? 28 अप्रैल को बुलाया गया विधानसभा का विशेष सत्र अब सिर्फ एक तारीख नहीं रहा साथ में ये सरकार की नीयत की भी परीक्षा है। क्यों कि अगर सरकार ईमानदार है, और इरादा साफ है, तो इस सत्र में सिर्फ औपचारिक कार्यवाही नहीं चलेगी बल्कि सीधा और स्पष्ट फैसला होना चाहिए। साथ ही लोकायुक्त पर खुली चर्चा और तत्काल नियुक्ति की घोषणा भी की जानी चाहिए।उत्तराखंड में भ्रष्टाचार कोई नई बात नहीं। यहां सिर्फ छोटी मछलियां ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े मगरमच्छ भी इस सिस्टम का हिस्सा बताए जाते हैं। जनता सालों से मांग कर रही है: पारदर्शिता, जवाबदेही और भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई की लेकिन बिना एक मजबूत और स्वतंत्र लोकायुक्त के ये सब सिर्फ वादे ही रह जाते हैं। लोकायुक्त कोई साधारण संस्था नहीं ये वो निगरानी तंत्र है जो सत्ता पर नजर रखता है प्रशासन को जवाबदेह बनाता है, और प्रभावशाली लोगों को भी कानून के दायरे में लाता है सीधे शब्दों में कहें तो लोकायुक्त के बिना भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई अधूरी है।

इस मामले में किसान मंच ने साफ शब्दों में कहा है अगर 28 अप्रैल के विशेष सत्र में लोकायुक्त पर चर्चा और नियुक्ति नहीं होती, तो जनता ये मान लेगी कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सारे नारे सिर्फ दिखावा हैं। एक तरह से अब गेंद सरकार के पाले में है। 28 अप्रैल का दिन तय करेगा क्या उत्तराखंड सच में भ्रष्टाचार मुक्त बनने की दिशा में कदम बढ़ाएगा, या फिर ये मुद्दा भी बाकी वादों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा। वैसे भी भ्रष्टाचार मुक्त उत्तराखंड के लिए लोकायुक्त कोई विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्यता है।