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संपर्क साहित्य संस्थान (उत्तराखंड इकाई) के तत्वावधान में हल्द्वानी में मातृ दिवस पर भव्य पुस्तक विमोचन समारोह — साहित्य, संवेदना और सृजन का अनुपम संगम

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अरूणा, भीमताल

हल्द्वानी। संपर्क साहित्य संस्थान (उत्तराखंड इकाई) के तत्वावधान में आगामी 10 मई 2026, रविवार (मातृ दिवस) के पावन अवसर पर हल्द्वानी में एक भव्य एवं गरिमामय पुस्तक विमोचन समारोह का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन मात्र एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समकालीन साहित्यिक चेतना, मातृत्व की गहन संवेदनाओं और क्षेत्रीय भाषा-संस्कृति के संरक्षण का सशक्त मंच सिद्ध होगा। कार्यक्रम का आयोजन नगर निगम सभागार, हल्द्वानी में प्रातः 11:00 बजे से किया जाएगा।

इस अवसर पर दो महत्वपूर्ण कृतियों—
“मौन से सृजन तक” (संपादक: ललिता कापड़ी) एवं
“श्रीमद्भगवद्गीता कुमाऊँनी रूपांतरण-टीका” (रूपांतरकार: कृष्णानंद चंदोला) का विधिवत विमोचन किया जाएगा। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हल्द्वानी के मेयर गजराज सिंह बिष्ट की गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। विशिष्ट अतिथियों के रूप में उत्तराखंड ओपन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी तथा वरिष्ठ साहित्यकार एवं संपादक आशा शैली कार्यक्रम को बौद्धिक ऊँचाई प्रदान करेंगे। समारोह की अध्यक्षता संपर्क साहित्य संस्थान की सहसचिव शशि कुडियाल करेंगे, जबकि मंच संचालन संस्था की मानद सचिव मीना जोशी द्वारा किया जाएगा। इस अवसर पर “मौन से सृजन तक” काव्य-संग्रह की समीक्षात्मक प्रस्तुति वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शशि जोशी द्वारा दी जाएगी, जो इस कृति के विषय-वस्तु, शिल्प और सामाजिक सरोकारों पर विस्तार से प्रकाश डालेंगी।
इस आयोजन के सफल क्रियान्वयन में संस्थान के अध्यक्ष अनिल लढ़ा, समन्वयक महासचिव रेनू शब्दमुखर तथा सक्रिय साहित्यकार ललिता कापड़ी सहित पूरी उत्तराखंड साहित्यिक टीम का विशेष योगदान है। उनके समर्पित प्रयासों से यह कार्यक्रम एक साधारण साहित्यिक आयोजन से आगे बढ़कर एक सांस्कृतिक आंदोलन का स्वरूप ग्रहण करता प्रतीत हो रहा है।
विशेष उल्लेखनीय है कि यह आयोजन मातृ दिवस जैसे भावनात्मक अवसर पर हो रहा है, जो मातृत्व, संवेदना और सृजन के अटूट संबंध को रेखांकित करता है। “मौन से सृजन तक” जहाँ अंतर्मन की अभिव्यक्ति को सशक्त स्वर देता है, वहीं गीता का कुमाऊँनी रूपांतरण जीवन के नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाने का माध्यम बनता है। ये दोनों कृतियाँ मिलकर इस अवसर को और भी सार्थक एवं स्मरणीय बना देती हैं।
आयोजकों ने साहित्य प्रेमियों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं आम नागरिकों से आग्रह किया है कि वे इस गरिमामय समारोह में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। यह आयोजन न केवल नई साहित्यिक कृतियों से परिचित होने का अवसर प्रदान करेगा, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध साहित्यिक परंपरा और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने व आगे बढ़ाने का भी माध्यम बनेगा।निस्संदेह, यह समारोह हल्द्वानी के साहित्यिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।