कार्यकर्ताओं का यूकेडी की ओर झुकाव
कालाढूंगी। भाजपा के गढ़ मानी जाने वाली कालाढूंगी विधानसभा-60 में पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ रहा है। वरिष्ठ से लेकर पुराने कार्यकर्ता तक मौजूदा विधायक और संगठन की कार्यशैली से नाराज़ नज़र आ रहे हैं।
स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि कालाढूंगी की स्थिति आज भी “जस की तस” है। सड़कें जगह-जगह टूटी-फूटी हैं, क्षेत्र में न तो कोई स्टेडियम है और न ही पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं। पार्टी भी कई गुटों में बंटी हुई दिखाई दे रही है।
“14 साल की उम्र से संघ और 50 बसंत भाजपा को देने के बाद भी मूल कार्यकर्ता आज खुद को ठगा महसूस कर रहा है,” एक वरिष्ठ कार्यकर्ता ने कहा। कार्यकर्ताओं ने अवैध शराब की खुलेआम बिक्री, स्मैक-चरस के बढ़ते कारोबार और बेरोजगारी के कारण युवाओं के नशे की चपेट में आने पर भी चिंता जताई।
पार्टी के अंदरूनी लोगों का मानना है कि 2027 का चुनाव जीतना है तो गुटबाजी छोड़कर एकजुट होना होगा। “शासन-प्रशासन में न पुराने कार्यकर्ताओं की सुनवाई हो रही है, न आम जनता की। अधिकारी, विधायक और सांसद को जनता की समस्याओं पर ध्यान देना होगा। पुलिस को अपराधियों पर अंकुश लगाना चाहिए, न कि उनके साथ खड़ा होना चाहिए,” कार्यकर्ताओं ने कहा।
यूकेडी को मिल सकता है फायदा
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अगर भाजपा एक बार फिर भगत परिवार को ही टिकट देती है और कांग्रेस पैराशूट प्रत्याशी पर भरोसा करती है, तो नाराज़ भाजपा-कांग्रेस कार्यकर्ताओं का एक बड़ा हिस्सा यूकेडी की ओर जा सकता है। ऐसे में “जय पहाड़, जय पहाड़ी” का क्षेत्रीय नैरेटिव, हिंदुत्व और लैंड जिहाद जैसे मुद्दों पर भारी पड़ सकता है। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने अब भी सड़क, अस्पताल, स्टेडियम, रोजगार और नशा-अपराध जैसे मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया तो 2027 में कालाढूंगी की जनता “हिसाब बराबर” कर देगी।





























