हल्द्वानी । निजी वित्त कंपनियों द्वारा वाहन स्वामियों के उत्पीड़न का मामला अब तूल पकड़ने लगा है। देवभूमि ट्रांसपोर्ट महासंघ ने सोमवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कंपनियों की वसूली शैली पर कड़ा विरोध जताया और राज्य सरकार से हस्तक्षेप की मांग की।
महासंघ के प्रदेश प्रवक्ता हरजीत सिंह चड्ढा और अध्यक्ष राकेश जोशी ने बताया कि कई वित्त कंपनियां एक-दो किस्त चूकने पर ही बिना नोटिस के वाहन जब्त कर रही हैं। नियमानुसार ऋण वसूली से पहले 90 दिन का विधिक नोटिस देना अनिवार्य है, लेकिन कंपनियां सड़क से ही बलपूर्वक वाहन उठा ले जाती हैं।
महासंघ ने आरोप लगाया कि वसूली दल चालकों से जबरन चाबी छीनते हैं और बाउंसरनुमा लोगों से धमकाते हैं। कार्यकारी महासचिव ललित पाठक, नगर प्रभारी भास्कर जोशी और संगठन मंत्री जय उप्रेती ने कहा कि यह सरासर गुंडागर्दी है।संयोजक पं. दया किशन शर्मा ने कहा कि पहाड़ी जिलों में खड़िया खन बंद होने से वाहन स्वामी पहले से रोजगार संकट झेल रहे हैं। ऐसे में वित्त कंपनियों का यह रवैया और मारक है।महासंघ ने मांग की कि सरकार वित्त कंपनियों को ऋण वसूली दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन कराए। हाल ही में उत्पीड़न का एक प्रकरण मुख्यमंत्री सचिव व कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत तक भी पहुंच चुका है। इस दौरान ललित रौतेला, बृजेश तिवारी, मोहन महतोलिया, रोहित रौतेला, नवीन मेलकानी, डीके शर्मा, उमेश चंद्र पांडे और किशन कोश्यारी सहित कई ट्रांसपोर्टर नेता मौजूद रहे। महासंघ ने चेताया कि वाहन स्वामियों के हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर संघर्ष किया जाएगा।





























