Home उत्तराखंड हल्दूचौड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंन्द में धूल फाक रही एक्सरें मशीन: हेमन्त गौनिया

हल्दूचौड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंन्द में धूल फाक रही एक्सरें मशीन: हेमन्त गौनिया

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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हल्दूचौड़ में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति एक बार फिर चर्चा में है। अस्पताल में एक माह पूर्व पहुँची नई एक्स-रे मशीन अब तक स्थापित नहीं की गई है और तकनीकी कारणों व बजट अभाव का हवाला देकर उसे चालू नहीं किया जा सका है। परिणामस्वरूप क्षेत्र की हजारों ग्रामीण आबादी को बुनियादी जाँच सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। समाजसेवी हेमंत गौनिया एवं सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य व समाजसेवी गोविन्द बल्लभ भट्ट ने 13 फरवरी 2026 को अस्पताल पहुँचकर चिकित्सा अधीक्षक से मशीन शीघ्र चालू कराने की मांग की। उनका कहना है कि मशीन एक माह से अधिक समय से अस्पताल परिसर में रखी है, लेकिन स्थापना व संचालन के लिए आवश्यक बजट और तकनीकी व्यवस्था नहीं की गई है।

प्रसव सेवाएँ भी प्रभावित

अस्पताल में महिलाओं के प्रसव (डिलीवरी) की सुविधा भी सुचारू रूप से संचालित नहीं हो पा रही है। समाजसेवियों का आरोप है कि स्टाफ की कमी, रिक्त पदों और संसाधनों के अभाव के कारण प्रसव सेवाएँ लगभग शून्य स्थिति में हैं। गर्भवती महिलाओं को हल्द्वानी या अन्य स्थानों की ओर रेफर किया जा रहा है, जिससे आर्थिक और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ रहे हैं।

हाई कोर्ट में लंबित याचिका

अस्पताल की बदहाल व्यवस्था को लेकर पूर्व में माननीय उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की जा चुकी है। समाजसेवियों का कहना है कि कई तिथियाँ लग चुकी हैं, किंतु अब तक अंतिम निर्णय लंबित है। उनका आरोप है कि न्यायालय के संज्ञान में सभी तथ्य पूर्ण रूप से नहीं पहुँच पाए, जिसके कारण अपेक्षित सुधारात्मक आदेश नहीं हो सके।

तमाशा बनकर रह गया अस्पताल

स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल केवल नाममात्र की सेवाएँ दे पा रहा है। एक्स-रे जैसी मूलभूत सुविधा का बंद रहना और प्रसव सेवाओं का प्रभावित होना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

समाजसेवियों ने मांग की है कि एक्स-रे मशीन को तत्काल स्थापित कर चालू किया जाए। रिक्त पदों पर शीघ्र नियुक्ति की जाए। प्रसव कक्ष को पूर्ण संसाधनों के साथ नियमित रूप से संचालित किया जाए। लंबित जनहित याचिका में शीघ्र निर्णय कर क्षेत्रवासियों को राहत दी जाए। क्षेत्र की जनता अब स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन से ठोस कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठी है, ताकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र वास्तव में “सामुदायिक” सेवा का केंद्र बन सके, न कि केवल औपचारिकता बनकर रह जाए।