“शब्दों की चौपाल” में गूंजे जागरूकता के स्वर
हल्द्वानी, 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर संपर्क संस्थान की उत्तराखंड इकाई एवं संपर्क साहित्य संस्थान के मासिक कार्यक्रम “शब्दों की चौपाल” के अंतर्गत एक विशेष पर्यावरण परिचर्चा का आयोजन उत्तराखंड ओपन यूनिवर्सिटी परिसर स्थित कम्युनिटी रेडियो हेलो हल्द्वानी (91.2 मेगाहर्ट्ज एफएम) में किया गया। यह सामुदायिक रेडियो सामाजिक, शैक्षिक एवं सांस्कृतिक विषयों को जन-जन तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम है, जिसे श्रोता 91.2 मेगाहर्ट्ज पर सुन सकते हैं।
कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाना तथा साहित्य, शिक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व को एक मंच पर लाना रहा। “शब्दों की चौपाल” के माध्यम से लंबे समय से साहित्यिक गतिविधियों को समाज के सरोकारों से जोड़ने का सार्थक प्रयास किया जाता रहा है और इसी श्रृंखला में यह विशेष परिचर्चा आयोजित की गई।

कार्यक्रम में वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं विदुषी डॉ. भगवती पनेरू, डॉ. हेमा पंत, आशा जी, ललिता कापड़ी, विज्ञान शिक्षिका स्मिता साह तथा युवा आर्किटेक्ट रुचिरा ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विविध पहलुओं पर अपने विचार साझा किए। चर्चा के दौरान पर्यावरणीय चुनौतियों, बदलती जीवनशैली, प्रदूषण, नई पीढ़ी की भूमिका तथा प्रकृति संरक्षण के व्यावहारिक उपायों पर गंभीर विमर्श हुआ।
डॉ. भगवती पनेरू ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए पुरानी पीढ़ी के अनुभवों और नई पीढ़ी के दृष्टिकोण का समन्वय आवश्यक है। उन्होंने सामूहिक प्रयासों के माध्यम से प्रकृति संरक्षण को नई दिशा देने पर बल दिया।
श्रीमती हेमा पंत ने अपने विचार रखते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक दिन का विषय नहीं, बल्कि जीवन का निरंतर दायित्व है। इसकी शुरुआत प्रत्येक व्यक्ति अपने घर, आंगन और दैनिक जीवन की छोटी-छोटी आदतों से कर सकता है।
विज्ञान शिक्षिका स्मिता साह ने पर्यावरण सूचकांकों, जलवायु परिवर्तन तथा पॉलिथीन के सूक्ष्म कणों से उत्पन्न होने वाले खतरों पर महत्वपूर्ण और रोचक जानकारी साझा की। वहीं युवा आर्किटेक्ट रुचिरा ने आधुनिक विकास और पर्यावरणीय संतुलन के बीच सामंजस्य स्थापित करने की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।
श्रीमती आशा पाण्डे ने अपने पिताजी और नाना जी के अनुभवों के माध्यम से प्रकृति के प्रति संवेदनशील जीवनशैली का महत्व बताया। वहीं “शब्दों की चौपाल” की प्रबंधक ललिता कापड़ी ने प्रकृति को एक स्त्री स्वरूप मानते हुए उसके सृजनात्मक, ममतामयी और संरक्षणकारी पक्ष को अत्यंत भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। उनके विचारों ने उपस्थित श्रोताओं को प्रकृति के साथ भावनात्मक जुड़ाव का संदेश दिया।
कार्यक्रम का संचालन आरजे सोनू भट्ट ने अपने सहज, प्रभावशाली और प्रेरणादायक अंदाज में किया, जिसकी सभी प्रतिभागियों ने सराहना की। कार्यक्रम के सफल आयोजन में सुनीता भास्कर का विशेष योगदान भी उल्लेखनीय रहा। पर्दे के पीछे रहकर उनके सहयोग ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
परिचर्चा में उपस्थित सभी वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं या औपचारिक आयोजनों का विषय नहीं है, बल्कि इसे जन-जन के आंदोलन का स्वरूप देना होगा। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने स्तर पर छोटे-छोटे प्रयास करे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और हरित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि साहित्य, शिक्षा, संवाद और सामाजिक चेतना के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण की भावना को व्यापक स्तर पर फैलाया जा सकता है। सामूहिक जागरूकता और सहभागिता ही प्रकृति तथा मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
विशेष सूचना:
पर्यावरण, शिक्षा, साहित्य और समाज से जुड़े ऐसे अनेक प्रेरक कार्यक्रम कम्युनिटी रेडियो हेलो हल्द्वानी 91.2 मेगाहर्ट्ज एफएम पर नियमित रूप से प्रसारित किए जाते हैं, जिन्हें श्रोता अपने रेडियो पर सुन सकते हैं।
स्मिता शाह “स्वयं”
मानद सदस्य
सम्पर्क साहित्य संस्थान






























