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आरएसएस की आड़ में पनपता भ्रष्टाचार का बाजार

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संघ की छवि पर लग रहा दाग

उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य है, जहां छोटी से छोटी हलचल भी आम जनमानस तक पहुंच ही जाती है, चाहे वो अफवाह हो या सच। लेकिन आज प्रदेश में जो सबसे बड़ी चर्चा है, वो है आरएसएस के नाम पर पनप रहे भ्रष्टाचार की। कुछ नौकरशाहों ने भ्रष्टाचार के ऐसे झंडे गाड़ दिए हैं कि उनके कारनामों की जानकारी सबको होने के बाद भी उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती। वजह सिर्फ एक है – उनकी पीठ पर आरएसएस का ठप्पा लगा हुआ है और इसी ठप्पे की आड़ में वे इतने बेफिक्र हो गए हैं कि हर गलत काम भी उन्हें सही लगने लगा है। यह उत्तराखंड है। यहां हर कोई जानता है कि कौन नौकरशाह चरण-वंदना कर रहा है और कौन आरएसएस की आड़ में खेल कर रहा है। स्थिति यह बन गई है कि जैसे ही समाज के बीच कोई कह दे कि वह आरएसएस से है, लोग उसे घृणा भरी नजरों से देखने लगे हैं। आखिर संघ जैसे राष्ट्रवादी संगठन को लेकर लोगों के मन में यह धारणा क्यों बनी?

इसका सबसे बड़ा कारण है – आरएसएस की आड़ में नौकरशाहों का बेलगाम होना। अपनी मनमर्जी से फैसले लेना, नियम-कायदों को ताक पर रखना और अपने चहेतों को ही सरकारी कामों के ठेके, पट्टे और लाभ पहुंचाना। आज हालत यह है कि आप कितने ही बड़े आईएएस, पीसीएस या बौद्धिक अधिकारी क्यों न हों, पहली प्राथमिकता सिर्फ आरएसएस की सेवा करने वाले व्यक्ति को ही मिलेगी। योग्यता बाद में, निष्ठा पहले।

कहते हैं कि कभी आरएसएस में बेईमानों के लिए कोई जगह नहीं थी। बेईमान व्यक्ति को संगठन से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता था। लेकिन आज तस्वीर उलट है। आज हर दो नंबर के काम के पीछे कोई न कोई आरएसएस से जुड़ा व्यक्ति ही खड़ा नजर आता है। इसका जीता-जागता उदाहरण वे नौकरशाह हैं, जिन पर विभागीय जांच चली, जो अटैच हुए, सस्पेंड होने चाहिए थे, लेकिन आज वे न सिर्फ नौकरी में बने हुए हैं, बल्कि प्रमोशन लेकर, ग्रेड पे बढ़वाकर मौज कर रहे हैं। जब जांच की परतें खुलती हैं, तो पता चलता है कि साहब का सीधा संबंध आरएसएस से है। बस, फिर क्या था। जांच ठंडे बस्ते में।

यहां तक कि एक अदना सा भ्रष्ट नौकरशाह भी इस ठप्पे के दम पर अपने से बड़े और ईमानदार अफसरों को भी अपने कदमों में झुकाने में लगा है। बड़े-बड़े दिग्गज अफसर आज उसके सामने गुलाम बने बैठे हैं। सच तो यह है कि भाजपा सरकार में जब तक आरएसएस का साया है, तब तक ये भ्रष्टाचारी बेलगाम रहेंगे। लेकिन सरकार बदलते ही यही आरएसएस वाला भ्रष्टाचारी नौकरशाह फिर गुलाम बनकर सिस्टम के सामने गिड़गिड़ाता नजर आएगा। आज उत्तराखंड में यह कहना गलत नहीं होगा कि आरएसएस की आड़ में भ्रष्टाचार फल-फूल रहा है और इससे संघ की दशकों की तपस्या से बनी छवि धूमिल हो रही है। अगर समय रहते संघ ने अपने भीतर पनप रहे इन भ्रष्टाचारियों को बाहर नहीं खदेड़ा, तो जनता का मोहभंग होना तय है।