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झूठ और पाखंड : विष्णु नागर

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भारत में इस समय विरोध की जो जबर्दस्त लहर चल रही है, उससे नरेन्द्र मोदी और मोहन भागवत एक समान घबराए हुए हैं, क्योंकि दोनों के हित समान हैं। एक के बगैर दूसरा अपंग है।

नरेन्द्र मोदी के बाद अब भागवत जी साफ़-साफ़ कह रहे हैं कि हमें आंदोलनों‌ से सावधान रहना होगा। इन्हें ये आंदोलनकारी विध्वंसक दिखाई देने लगे हैं, जबकि इस मोड़ पर आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा है।

इनका कहना है कि ये ताकतें समाज में विभाजन बढ़ाना चाहती हैं। राजनीतिक हथियार की तरह इनका इस्तेमाल कर रही हैं। जिनका खुद का रिकॉर्ड देश में नफ़रत फै़ैलाने का रहा है, उनके मुंह से ये बातें पाखंडपूर्ण और हास्यास्पद लगती हैं।भागवत जी अपने दशहरा संबोधन में कहते हैं कि सरकार बदलने से स्थितियां नहीं बदलतीं। अच्छा ऐसी बात है क्या? इन्हें कौन बताएगा कि इन साढ़े बारह वर्षों में इनके सत्ता में आने के बाद स्थितियां बेहद बदली हैं, हर अर्थ में पहले से ज्यादा बदतर हुई हैं। अन्ना हजारे के नेतृत्व में संघ और भाजपा ने सत्ता परिवर्तन का खेल ही खेला था और उसमें ये सफल भी रहे और अब ये उपदेश दे रहे हैं कि सरकार बदलने से स्थितियां नहीं बदलतीं! इनके पाखंड और झूठ का कोई जवाब नहीं, कोई सीमा नहीं! इनका हर वाक्य झूठ और पाखंड का लबादा ओढ़े रहता है।

इनके शब्दाडंबर का कुल मतलब ये है कि जो चल रहा है,चलने दो। मोदी ने इसीलिए भागवत जी के कल के भाषण की ट्वीट करके तारीफ़ की है।

एक- दो बातों पर और गौर करें। हमेशा ये समाज में विभाजन बढ़ने से चिंतित रहते हैं। ये कहते नहीं हैं कि ये किस समाज की बात कर रहे हैं, मगर सब सम़झते हैं कि इनका आशय हिंदुओं से है। ये सौ साल से यह झूठ फैलाते आए हैं कि हिंदू समाज एक है। कोई भी धार्मिक समुदाय कभी संपूर्ण रूप से एक नहीं रहा, न कभी एक हो सकता है। हिंदुओं में तो भेद की, ऊंच-नीच की, अपमान की, नीचा दिखाने की इतनी लंबी परंपरा और परतें हैं कि शायद ही किसी अन्य धार्मिक समुदाय में हों। वैसे भी किसी धार्मिक समुदाय की एकता बहुत बड़ा झूठ है क्योंकि कोई समुदाय सिर्फ धार्मिक ही नहीं होता। उसमें भी अनेक तरह के हित होते हैं और हितों का टकराव भी होता है।

अगर ‘हिंदू एकता’ की बात सच होती, तो संघ को मुस्लिम समुदाय के खिलाफ अपनी तथाकथित हिंदू एकता को अपना आधार नहीं बनाना पड़ता। खासकर इन साढ़े बारह वर्षों में एकता के इनके झूठ का इतना अधिक पर्दाफाश हो चुका है कि संघ और भाजपा घबराई हुई है, क्योंकि मुस्लिम विरोधी हिंदू एकता का जो मोम का महल इन्होंने खड़ा किया था, उसमें आग लग चुकी है। वह धू-धू कर जलने लगा है।

एक इन्होंने यह झूठ फैलाने की कोशिश भी की है कि आज जो हो रहा है, उसके पीछे विदेशी ताकतें हैं। अगर ऐसा है, तो वे ताकतें कौन सी हैं? जरा उनका नाम तो लो और तुम्हारे पास तो सरकार है, अगर यह सच है, तो तथ्य सामने रखो।वैसे विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कल ही कहा है कि उनके पास इन आंदोलनकारियों को विदेशी धन मिलने की सरकार को कोई जानकारी नहीं है।वैसे भी अमेरिका, इस्राइल तो आपके भी पक्के दोस्त हैं। रूस आपका दुश्मन नहीं, दोस्त है और वह खुद युद्ध में फंसा हुआ है। चीन ने हमारी जमीन हड़प रखी है, फिर भी आप उससे दोस्ती बढ़ाने के लिए लालायित हो। उधर पूरा यूरोप खुद विरोध की आग में धू-धू कर जल रहा है। फ्रांस, स्पेन, इटली, बेल्जियम, पुर्तगाल, अल्बानिया, सर्बिया सब जल रहे हैं और यह आग भारत में विरोध की आग से ज्यादा उन देशों की सरकारों के लिए चिंताजनक है। वहां हिंसा भी हो रही है।

(कई पुरस्कारों से सम्मानित विष्णु नागर साहित्यकार और स्वतंत्र पत्रकार हैं। वे जनवादी लेखक संघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं।)