हल्द्वानी। उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच के तत्वावधान में आज रामपुर तिराहा गोलीकांड की बरसी पर तिकोनिया स्थित हरिप्रसाद टम्टा पार्क में शहीद राज्य आंदोलनकारियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। जिला अध्यक्ष राजेंद्र सिंह बिष्ट के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम में आंदोलनकारियों ने दो मिनट का मौन रखकर शहीदों को नमन किया और उनके बलिदान को याद किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि 2 अक्टूबर 1994 की रात रामपुर तिराहा (मुजफ्फरनगर) में उत्तराखंड की मांग को लेकर दिल्ली जा रहे निहत्थे आंदोलनकारियों पर बर्बर गोलीकांड हुआ था, जिसमें कई लोग शहीद हुए थे और महिलाओं के साथ अमानवीय व्यवहार हुआ था। यह दिन उत्तराखंड के इतिहास का सबसे काला दिन है।जिला अध्यक्ष राजेंद्र सिंह बिष्ट ने कहा कि राज्य बने 25 वर्ष से अधिक हो गए, लेकिन रामपुर तिराहा कांड के दोषियों को आज तक सजा नहीं मिल पाई है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकारों ने शहीदों के सपनों के अनुरूप राज्य का विकास नहीं किया। उन्होंने मांग की कि दोषियों को शीघ्र सजा दिलाई जाए और शहीद आंदोलनकारियों के परिजनों को सम्मान दिया जाए। दर्जा राज्यमंत्री मोहन पाठक ने कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष से ही उत्तराखंड राज्य मिला है। उनके बलिदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। सरकार को चाहिए कि चिन्हित आंदोलनकारियों की समस्याओं का प्राथमिकता से समाधान करे। महिला प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष ज्योत्सना पांडे और महानगर अध्यक्ष भगवती बिष्ट ने कहा कि आंदोलन में महिलाओं की अहम भूमिका रही है, लेकिन आज भी महिला आंदोलनकारियों को उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है।कार्यक्रम में जिला महामंत्री हेम पाठक, सावित्री देवी, अयोध्या प्रसाद केसरवानी, जितेंद्र उप्रेती, विनय पांडे, भास्कर पांडे, ए. प्रकाश कुमार, नीरज कुमार सहित बड़ी संख्या में राज्य आंदोलनकारी मौजूद रहे।

































