13 से 16 जून तक नो एंट्री, शटल से ही पहुंच सकेंगे कैंची धाम, नैनीताल पुलिस ने पूरी की तैयारियां
नैनीताल । विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम में 15 जून 2026 को आयोजित होने वाले स्थापना दिवस एवं बाबा नीम करौली महाराज जन्मोत्सव मेले के लिए नैनीताल पुलिस और प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टी.सी. ने बताया कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए इस बार सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को और सुदृढ़ किया गया है।
मेले की तैयारियों को लेकर जिलाधिकारी और एसएसपी नैनीताल ने संयुक्त बैठकें और स्थलीय निरीक्षण किए। पुलिस महानिरीक्षक कुमाऊं परिक्षेत्र और आयुक्त कुमाऊं मंडल ने भी व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मुख्यमंत्री उत्तराखंड, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भी तैयारियों का आकलन हो चुका है। पुलिस, वन, लोक निर्माण, स्वास्थ्य, विद्युत और अन्य विभागों की एकीकृत कार्ययोजना के तहत टीमें मेले के दौरान तैनात रहेंगी।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा और जाम से बचने के लिए 13 जून से 16 जून तक विशेष ट्रैफिक प्लान लागू रहेगा। इस दौरान किसी भी श्रद्धालु को निजी वाहन से सीधे कैंची धाम तक जाने की अनुमति नहीं होगी। सभी को निर्धारित पार्किंग में वाहन खड़े कर शटल सेवा लेनी होगी। हल्द्वानी, काठगोदाम से आने वालों के लिए भीमताल स्थित विकास भवन पार्किंग निर्धारित की गई है। रामनगर और नैनीताल की ओर से आने वालों के लिए मेट्रोपोल पार्किंग और डीएसए ग्राउंड पार्किंग का उपयोग होगा। हल्द्वानी बस स्टेशन, रेलवे स्टेशन और काठगोदाम रेलवे स्टेशन से विशेष बस और मिनी बस सेवाएं चलेंगी। तल्लीताल बस स्टेशन से भी शटल संचालित की जाएंगी।
13 से 16 जून तक आवश्यक वस्तुओं वाले वाहनों को छोड़कर अन्य सभी मालवाहक वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध रहेगा। इनके लिए टनकपुर होकर बागेश्वर, पिथौरागढ़ और रामनगर होकर अल्मोड़ा जाने का वैकल्पिक मार्ग तय किया गया है। मेले में एसएसबी, पीएसी, एसडीआरएफ, फायर सर्विस, बम निरोधक दस्ता और एटीएस समेत सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती की जा रही है। पुलिस मुख्यालय से अतिरिक्त बल मंगाया गया है। कुल 1500 से अधिक पुलिस अधिकारी और कर्मचारी विभिन्न ड्यूटी प्वाइंट पर तैनात रहेंगे।
एसपी डॉ. मंजूनाथ ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे ट्रैफिक प्लान का पालन करें और यात्रा से पहले सोशल मीडिया पर जारी दिशा-निर्देश पढ़ें। पहाड़ी मार्गों की सीमित क्षमता के कारण अंतिम चरण में शटल सेवा का उपयोग अनिवार्य होगा। प्रशासन ने सभी से सहयोग की अपेक्षा की है ताकि दर्शन शांतिपूर्ण और सुरक्षित संपन्न हो सकें।





























