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आरटीआई एक्टिविस्ट हेमंत सिंह गौनिया की अपील पर शासन में हलचल

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प्रदूषण मामले में कई वरिष्ठ अधिकारी तलब, 16 मार्च को देहरादून में सुनवाई


हल्द्वानी/देहरादून। उत्तराखंड में प्रदूषण से जुड़े एक मामले में समाजसेवी एवं आरटीआई एक्टिविस्ट हेमंत सिंह गौनिया की शिकायत और उसके बाद दायर अपील पर शासन स्तर पर हलचल तेज हो गई है। उत्तराखंड शासन के अपीलीय प्राधिकरण ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कई विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब करते हुए सुनवाई की तिथि 16 मार्च 2026 को सुबह 11:30 बजे देहरादून में निर्धारित की है।
अपीलीय प्राधिकरण द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह सुनवाई उत्तराखंड शासन के न्याय एवं विधि विभाग कार्यालय, देहरादून में अपीलीय प्राधिकरण के अध्यक्ष के समक्ष आयोजित होगी। यह मामला जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1974 की धारा-28 तथा वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1981 की धारा-31 के अंतर्गत दायर अपील से संबंधित है, जिसमें उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भी पक्षकार बनाया गया है। सूत्रों के अनुसार इस मामले में शासन स्तर के कई महत्वपूर्ण अधिकारियों को बैठक में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं, जिनमें अपर सचिव वन एवं पर्यावरण विभाग, अपर सचिव उद्योग विभाग, अपर प्रमुख वन संरक्षक (परियोजनाएं) तथा न्याय एवं विधि विभाग से जुड़े अधिकारी शामिल हैं। सभी अधिकारियों को निर्धारित समय पर सुनवाई में उपस्थित होकर मामले से संबंधित पक्ष और दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि समाजसेवी हेमंत सिंह गौनिया ने प्रदेश में प्रदूषण से जुड़े एक मामले को लेकर पहले संबंधित विभागों में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन सुनवाई और कार्रवाई न होने पर उन्होंने नियमानुसार शासन के अपीलीय प्राधिकरण में अपील दायर कर दी। अब उसी अपील पर शासन ने गंभीर रुख अपनाते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को तलब कर लिया है। इस सुनवाई में देहरादून निवासी प्रवीण कुमार समाजसेवी हेमंत सिंह गौनिया के प्रतिनिधि के रूप में अपीलीय प्राधिकरण के समक्ष उनका पक्ष रखेंगे और पूरे मामले से जुड़े तथ्यों को विस्तार से प्रस्तुत करेंगे।
उल्लेखनीय है कि हल्द्वानी के समाजसेवी हेमंत सिंह गौनिया लंबे समय से आरटीआई और जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं। विभिन्न विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित कराने को लेकर उनकी सक्रियता लगातार चर्चा में रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आरटीआई के माध्यम से उठाए जा रहे मुद्दों के कारण कई मामलों में शासन और प्रशासन को कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ा है। सूत्रों का कहना है कि 16 मार्च को देहरादून में होने वाली इस सुनवाई को लेकर संबंधित विभागों में भी हलचल तेज हो गई है और अधिकारियों को पूरे प्रकरण से जुड़े दस्तावेजों के साथ उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं।