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IAS केंद्र का, कुर्सी राज्य की

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केंद्र भेजता है अधिकारी, मुख्यमंत्री तय करता है ठहराव

कुर्सी का खेल: 25 साल में 13 आयुक्त, किसी ने 6 साल संभाला तो कोई 6 महीने भी नहीं टिके

देहरादून। भारतीय प्रशासनिक सेवा (इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस) यानि आई.ए.एस. केंद्र सरकार की सर्विस है, लेकिन इनका “कैडर” राज्य को आवंटित होता है। आयुक्त जैसे पद पर नियुक्ति, तबादला, हटाना ये सब राज्य सरकार यानी मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल के हाथ में होता है। केंद्र सिर्फ कैडर मैनेज करता है, पोस्टिंग राज्य सरकार तय करती है।‌
राज्य निर्माण से यानि वर्ष 2000 से 2026 तक के प्रशासनिक रिकॉर्ड पर नजर डालें तो एक बात साफ है कि आयुक्त की कुर्सी पर स्थिरता शायद सबसे बड़ी चुनौती रही है। 25 वर्षों में 13 आई.ए.एस. अधिकारियों ने कमान संभाली। औसत कार्यकाल मुश्किल से 2 साल बैठता है। जिसमें सबसे लंबा कार्यकाल राकेश शर्मा, आईएएस का रहा। वे 2001 से 2007 तक, लगातार 6 साल आयुक्त पद पर रहे। उनका कार्यकाल स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। वहीं सबसे छोटा कार्यकाल 3 अधिकारियों का रहा, जिन्होंने एक कैलेंडर वर्ष से भी कम समय पद संभाला। जिसमें मुख्य रूप से आर.के. शुधांशु, आईएएस 2013 में, दीपक रावत, आईएएस 2016 में, सुशील कुमार, आईएएस 2021 में। इन तीनों का कार्यकाल कुछ महीनों का ही रहा। दिलचस्प बात यह कि दीपक रावत दो बार आयुक्त बने 2016 में कुछ महीनों के लिए और फिर 2021 से अब तक लगातार पद पर बने हुए हैं, जो वर्तमान में सबसे लंबे समय से कार्यरत आयुक्त हैं। वैसे‌ तो आईएएस अधिकारियों का नियमित अंतराल पर तबादला शासन की सामान्य प्रक्रिया है। इससे अधिकारियों को विविध अनुभव मिलता है और किसी एक पद पर “जमाव” नहीं होने पाता। आयुक्त जैसे महत्वपूर्ण पद पर सरकार और स्थानीय निकाय के बीच तालमेल जरूरी होता है। यदि तालमेल न बैठे तो कार्यकाल छोटा हो जाता है। वहीं शहरी विकास, अतिक्रमण, सफाई, टैक्स वसूली जैसे जटिल मुद्दे आयुक्त के सामने होते हैं। दबाव अधिक होने पर अधिकारी का जल्दी स्थानांतरण हो जाता है। कई बार अधिकारी को राज्य स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी मिलने या केंद्र में प्रतिनियुक्ति पर जाने के कारण भी कार्यकाल बीच में समाप्त करना पड़ता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि राकेश शर्मा का 6 साल का कार्यकाल इसलिए संभव हुआ क्योंकि उन्हें नीतिगत निरंतरता और राजनीतिक समर्थन दोनों मिले। वहीं छोटे कार्यकाल अक्सर संक्रमणकालीन नियुक्तियों या प्रशासनिक समायोजन का परिणाम होते हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या दीपक रावत का वर्तमान कार्यकाल राकेश शर्मा के 6 साल के रिकॉर्ड को तोड़ पाएगा।