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कर्म ही पहचान है…

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कहते हैं इंसान के कर्म ही इंसान के वजूद और उसकी चर्चा को सार्थक बनाते हैं। उन्हीं में से एक थे नैनीताल जिला सूचना अधिकारी गिरिजा शंकर जोशी। आज जब वो हमारे बीच नहीं हैं, तो ये पंक्ति और भी सार्थक लगती है। गिरिजा शंकर जोशी जी को लोग उनके पद से नहीं, उनके व्यवहार से जानते थे।

वो कुर्सी पर बैठने वाले अधिकारी नहीं थे, दिलों में बैठने वाले इंसान थे।

पत्रकारों के लिए वो एक सूचना अधिकारी से बढ़कर बड़े भाई, सच्चे साथी और सच्चे मार्गदर्शक थे। किसी पत्रकार का फोन कभी व्यस्त नहीं मिला, किसी की समस्या को उन्होंने कभी छोटा नहीं समझा। हर पत्रकार को एक ही नज़र से देखना उनकी सबसे बड़ी पहचान थी। शायद यही वजह है कि आज नैनीताल जिले के हर पत्रकार की आंख नम है। प्रशासन में रहकर भी उन्होंने कभी प्रशासनिक दीवार खड़ी नहीं की। जिलाधिकारी कार्यालय से लेकर मीडिया सेंटर तक, हर कोई उनके हंसमुख स्वभाव का कायल था। उनका ठहाका, उनका कंधे पर हाथ रखकर “अरे हो जाएगा” कहना, अब हमेशा के लिए खामोश हो गया।

पिथौरागढ़, चंपावत और फिर नैनीताल में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने जो कर्म किए, वही आज उनकी चर्चा बन गए हैं, जो उनके कर्मों की जीवित निशानी हैं। शायद कर्तव्य के प्रति समर्पण की इससे बड़ी मिसाल नहीं हो सकती। कर्म करते-करते ही कर्मयोगी चला गया। आज उनका किराए का छोटा सा आशियाना बीके पुरम में लोगों से भरा था। जिसको खबर मिली, वह उनके इस आशियाने की ओर दौड़ पड़ा। जिलाधिकारी, एसएसपी, एसडीएम से लेकर सांसद तक, सबकी आंखों में एक ही दर्द था – हमने एक अच्छा इंसान खो दिया। गिरिजा जी, आप भले ही चले गए, लेकिन आपके कर्म, आपका व्यवहार और आपकी मुस्कान हमेशा नैनीताल के पत्रकार जगत के साथ-साथ जो भी आपका चिर-परिचित रहा होगा, उनके दिल में जिंदा रहेगी।

आपको शत-शत नमन, विनम्र श्रद्धांजलि।