Home उत्तराखंड ‘शब्दों की चौपाल’ में साहित्य, सम्मान और आत्मीयता का संगम

‘शब्दों की चौपाल’ में साहित्य, सम्मान और आत्मीयता का संगम

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रानीबाग / हल्द्वानी।‌ सम्पर्क संस्थान उत्तराखंड इकाई के बैनर तले आयोजित मासिक साहित्यिक गोष्ठी ‘शब्दों की चौपाल’ इस बार साहित्य, सम्मान, रचनात्मकता और आत्मीय मिलन का सुंदर संगम बनकर सामने आई। गोष्ठी का आयोजन संयोजिका देवीना आदित्य एवं एडवोकेट मीना जोशी के संयोजन में किया गया।

खराब मौसम के बावजूद वरिष्ठ साहित्यकारों एवं साहित्यप्रेमियों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा बढ़ाई। गोष्ठी में वरिष्ठ साहित्यकार आशा शैली, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गीता मिश्रा ‘गीत’, सम्पर्क संस्थान की उत्तराखंड प्रभारी ललिता कापड़ी, लेखिका स्मिता साह ‘शायराना स्वयं’, एडवोकेट मीना जोशी, देवीना आदित्य एवं आशा पाण्डे सहित साहित्यप्रेमियों ने सहभागिता की।

गोष्ठी का प्रमुख आकर्षण शिक्षक दिवस के अवसर पर नियमित रूप से मासिक गोष्ठियों में सहभागिता करने वाली शिक्षिकाओं का सम्मान रहा। शिक्षकों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उन्हें स्नेहस्वरूप उपहार भेंट किए गए। कार्यक्रम में हिंदी के शुद्ध एवं सुंदर प्रयोग, शेरो-शायरी और ग़ज़ल जैसे विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने काव्य-पाठ के माध्यम से अपने भावों और विचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

गोष्ठी को रोचक बनाने के लिए विभिन्न साहित्यिक एवं मनोरंजक खेलों का आयोजन भी किया गया। प्रत्येक प्रतिभागी को एक शब्द देकर उस पर तत्काल रचनात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत करने की गतिविधि ने कार्यक्रम में उत्साह और रोमांच बढ़ाया।

इस अवसर पर लेखिकाओं ने अपनी पुस्तकों का परस्पर आदान-प्रदान करते हुए साहित्यिक संवाद और पठन-संस्कृति को बढ़ावा दिया। मौसम की ठंडक के बीच गरमा-गरम चाय, नाश्ते और आत्मीय बातचीत ने आयोजन को और खुशनुमा बना दिया।

आयोजन के पश्चात संयोजिका देवीना आदित्य ने सभी अतिथियों एवं साहित्यकारों का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि खराब मौसम के बावजूद सभी की उपस्थिति ने उनके घर और मन दोनों को खुशियों से भर दिया। उन्होंने आतिथ्य में किसी भी प्रकार की त्रुटि के लिए विनम्रतापूर्वक क्षमा भी मांगी।सम्पर्क संस्थान की उत्तराखंड प्रभारी ललिता कापड़ी ने देवीना आदित्य के आत्मीय आतिथ्य और सकारात्मक ऊर्जा की सराहना करते हुए कहा कि उनकी मेजबानी ने इस साहित्यिक मिलन को विशेष और यादगार बना दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन साहित्यकारों को जोड़ने के साथ-साथ साहित्यिक सौहार्द और आपसी आत्मीयता को भी मजबूत करते हैं।

विशेष रूप से वरिष्ठ साहित्यकार आशा शैली लालकुआँ से रानीबाग पहुंचीं। उनकी उपस्थिति ने गोष्ठी की साहित्यिक गरिमा को और बढ़ाया। गोष्ठी का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि ‘शब्दों की चौपाल’ इसी तरह साहित्य, स्नेह, सम्मान और संवाद की खुशबू बिखेरती रहेगी तथा साहित्यप्रेमियों को निरंतर एक-दूसरे से जोड़ती रहेगी।