राजनीति का गणित सीधा है “जहाँ संगठन सोया, वहाँ जन सुराज जागा। जहाँ नाराजगी थी, वहाँ कांग्रेस लौटी। और जहाँ सब सेट था, वहाँ बीजेपी ने फिर झंडा गाड़ दिया।”
जनता ने तीन राज्यों में तीन अलग-अलग थाल परोसे… और बीजेपी को समझ नहीं आया कि चम्मच किसमें डुबोएं।
उपचुनाव का रिपोर्ट कार्ड
बांकीपुर, बिहार में “जन सुराज” का उदय हुआ और “सम्राट” की नींद उड़ गई। PK ने 19 हजार से ज्यादा वोटों से जीतकर बता दिया कि अब बिहार में सिर्फ लालटेन और कमल नहीं, तीसरा “रणनीतिकार वाला ब्रांड” भी चल गया। बीजेपी के लिए हार के 4 कारण गिनाए गए हैं प्रचार, उम्मीदवार, रणनीति और वोटिंग। मतलब हार का ठीकरा फोड़ने के लिए 4 दीवारें भी कम पड़ गईं।
वहीं दतिया, मध्य प्रदेश में “कांग्रेस की वापसी” हुई, मध्य प्रदेश में कमल थोड़ा मुरझाया और हाथ में फिर जान आई। यहाँ कारण है “टिकट कटने से नाराजगी” और “बूथ प्रबंधन कमजोर”। यानि घर में ही कलह, और पड़ोसी जीत गया।
मंजलपुर, गुजरात में भले ही भाजपा को जीत मिली हो लेकिन यह जीत महज गुजराती होने के कारण मिली। यानि देश के मुख्य बिंदु पर गुजरातियों के होने का प्रमाण है या एक तरह से गुजराती फैक्टर ही सबसे बड़ा कैंडिडेट था, बाकी सब औपचारिकता। गुजरात में बीजेपी का रिमोट अभी किसी और के हाथ नहीं लगा।
“सम्राट की हार” सुनकर लगा कोई महाभारत हो गया। पर असल में हुआ ये कि बिहार में नया खिलाड़ी मैदान में आया, एमपी में पुराना खिलाड़ी वापस आया, और गुजरात में पुराना खिलाड़ी कुर्सी से नहीं हिला।































