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सुनवाई नहीं तो हड़ताल सही

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“कागजों पर ही चलता है विकास”: 20 अगस्त से उत्तराखंड में ट्रकों की हड़ताल तय

सालों से मांगें लंबित, सरकार को अब नींद आई तो अल्टीमेटम मिला

देहरादून। उत्तराखंड सरकार की “सब ठीक है” वाली फाइलों में अब दरार पड़ने वाली है। वर्षों से अनसुनी मांगों से तंग आकर उत्तराखंड देवभूमि ट्रक ओनर्स महासंघ ने आखिरकार चाबी घुमाने से मना कर दिया है। महासंघ ने साफ कर दिया है कि 20 अगस्त 2026, सुबह 6 बजे से पूरे प्रदेश में ट्रकों के पहिए अनिश्चितकाल के लिए जाम रहेंगे। यानी जरूरी सामान, सीमेंट, राशन – सबका ठप। प्रदेश अध्यक्ष राकेश जोशी का कहना है कि सरकार को पत्र लिखते-लिखते स्याही खत्म हो गई, बैठक मांगते-मांगते जूते घिस गए, लेकिन अफसरों की फाइलें “परीक्षणाधीन” से आगे नहीं बढ़ीं। 14 दिसंबर 2024 को कुमाऊं कमिश्नर की अध्यक्षता में जो समझौता हुआ था उसकी रिपोर्ट ही 20 महीने से किसी दराज में सो रही है।

“हम दोषी, सरकार बेकसूर” – 11 सवाल सरकार से

“चलाओ तो चालान, रोको तो घाटा”

  1. पुलिस राज vs परिवहन राज: SI, ASI, 112, चौकी सब चालान काट रहे हैं। ₹2.41 लाख तक का जुर्माना। सरकार ने ट्रांसपोर्ट को पुलिस थाना बना दिया है क्या?
  2. आस्था के नाम पर व्यापार बंद: चारधाम-कांवड़ के नाम पर साल के 120 दिन ट्रक बंद। भक्तों की आस्था ठीक है, पर ट्रक ओनर्स का EMI कौन भरेगा?
  3. टैक्स का बोझ, राहत जीरो: यूपी में 125% छूट मिल रही है, यहां हर साल 5% टैक्स बढ़ोतरी। “डबल इंजन” की रफ्तार सिर्फ टैक्स बढ़ाने में दिख रही है।
  4. भाड़ा 2022 का, महंगाई 2026 की: डीजल-बीमा-वेतन 30% महंगा, पर भाड़ा वही 4 साल पुराना। सरकार को लगता है ट्रक हवा से चलते हैं?
  5. GVW और कांटे: 16200 की लिमिट में 18500 का खर्चा। बॉर्डर पर कांटे लगाने की मांग 5 साल से है, पर सरकार को “ऑटोमेटिक” शब्द से ही एलर्जी है।
  6. ATS के लिए 200 KM का सफर: फिटनेस कराने ट्रक मालिक को पहाड़ से मैदान दौड़ना पड़ रहा है। दलाल खुश, सरकार मौन।

बाकी मांगें – ट्रांसपोर्ट नगर, ऑल इंडिया परमिट, खनन लोडिंग – ये सब फाइलों में “अध्ययन किया जा रहा है” लिखकर ठंडे बस्ते में हैं। महासंघ ने सरकार को 20 अगस्त तक का समय दिया है। उसके बाद प्रदेश की सड़कों पर ट्रक नहीं, सिर्फ सन्नाटा दिखेगा। जिम्मेदारी किसकी होगी? जाहिर है सरकार बताएगी “हमें पहले पता नहीं था”। पत्र की कॉपी DGP, सचिव, DM, SP सबको गई है। अब देखना है ये फाइल भी बाकी फाइलों की तरह रद्दी में जाती है या कोई “माननीय” इसे खोलकर पढ़ता भी है। बैठक में राकेश जोशी, ललित पाठक, दयाकिशन शर्मा , गिरीश मलकानी, रोहित रौतेला, हरजीत सिंह चड्ढा नीरज नेगी, जगमोहन उप्रेती भास्कर जोशी, वीरेंद्र सिंह लोढ़ियाल, हरीश जोशी , राजेश नौलिया, नवीन मेलकानी, अनिल सिंह, करण मनराल आदि मौजूद रहे।