दया भट्ट दया, खटीमा (उत्तराखंड)
माँ जगदंबा के चरणों में समर्पित गीत
पारिजात के फूल चुन लाई, माँ, गजरा बना दूँ क्या?
अपने हाथों से माँ, तेरे केश सजा दूँ क्या?
तेरी चौखट बैठी हूँ माँ, मन में आस जगाए,
तेरी ममता पाने को माँ, नन्हे हाथ बढ़ाए।
मन की सारी बात आज माँ, मैं तुझको सुना दूँ क्या?
पारिजात के फूल चुन लाई, माँ, गजरा बना दूँ क्या?
भोर हुई, कलियाँ मुस्काईं, ओस मोती बन आई,
तेरी पूजा करने को माँ, फ़ूलों को चुनने आई।
इन फूलों में अपनी श्रद्धा, प्रेम के रंग मिला दूँ क्या?
पारिजात के फूल चुन लाई, माँ, गजरा बना दूँ क्या?
लाल चुनरिया ओढ़े मैया, जब दरबार में आए,
तेरे मुख की दिव्य आभा से, चंदा लाज छिपाए।
तेरी बिंदी में सूरज, माँ, माथे पर सजा दूँ क्या?
पारिजात के फूल चुन लाई, माँ, गजरा बना दूँ क्या?
मेरे सुख की बात न पूछो, जग की पीड़ा हरना,
भटके हुए हर हृदय को माँ, प्रेम-डगर पर धरना।
तेरे आँचल की छाया में, जग को ठौर दिला दूँ क्या?
पारिजात के फूल चुन लाई, माँ, गजरा बना दूँ क्या?
मेरे पास नहीं है मैया, सोना-चाँदी, हीरा,
तेरे नाम की ज्योति जले, मन में हो उजियारा।
अपने जीवन का हर पल माँ, तेरे नाम लगा दूँ क्या?
पारिजात के फूल चुन लाई, माँ, गजरा बना दूँ क्या?
जब तक साँस रहेगी मैया, तेरा नाम पुकारूँगी,
तेरे चरणों में अपने माँ, सारे सुख-दुख वारूँगी।
अपनी श्रद्धा के धागों से, तुझको आज बंधा दूँ क्या?
पारिजात के फूल चुन लाई, माँ, गजरा बना दूँ क्या?


































