Home उत्तराखंड शरद पूर्णिमा पर अमृत योग : डा. मन्जू जोशी

शरद पूर्णिमा पर अमृत योग : डा. मन्जू जोशी

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कल खुले आसमान में रखी खीर से मिलेगा आरोग्य का वरदान

क्षीरोदार्णवसंभूता पद्मयुक्ता महाप्रभा।
लोकमातर्जगन्नाथपत्नी मां पातु सर्वदा॥

अवगत कराना चाहूंगी दिनांक 25 अक्टूबर 2026 दिन रविवार को शरद पूर्णिमा उपवास रखा जाएगा, स्नानदानार्थ पूर्णिमा रहेगी 26 अक्टूबर 2026 सोमवार को।

आश्विन माह की पूर्णिमा केवल एक तिथि नहीं, अपितु ब्रह्मांडीय ऊर्जा के जागृत होने का ऐसा पावन अवसर है जब चंद्रदेव अपनी समस्त सोलह कलाओं—(अमृत, मनदा, पुष्प, पुष्टि, तुष्टि, ध्रुति, शाशनी, चंद्रिका, कांति, ज्योत्सना, श्री, प्रीति, अंगदा, पूर्ण, पूर्णामृत व स्वरूपवस्थित) से आच्छादित होकर पृथ्वी पर दिव्य ओज और आरोग्य रूपी अमृत की वर्षा करते हैं।
धार्मिक मान्यतानुसार इसी शुभ तिथि पर समुद्र मंथन के समय धन-धान्य की अधिष्ठात्री देवी माँ महालक्ष्मी और आरोग्य प्रदान करने वाले धन्वंतरि देव का प्रादुर्भाव हुआ था। तत्पश्चात माँ लक्ष्मी का भगवान श्री हरि विष्णु से पुनः विवाह भी इसी पावन अवसर पर संपन्न हुआ था।

कोजागर का मूल अर्थ

‘कोजागर’ शब्द क + ओज + आगर के दिव्य मेल से निर्मित है। इस रात्रि चंद्र किरणों के माध्यम से साधक को आत्मशक्ति और परम आनंद प्राप्त होता है। इसी दिन से कार्तिक पूर्णिमा तक प्रतिदिन संध्या समय आकाशदीप प्रज्वलित करने का विधान है, जिससे गृहस्थ जीवन से दरिद्रता और दुखों का शमन होता है।

तिथि, शुभ मुहूर्त एवं योग (2026)

पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ: 25 अक्टूबर 2026 प्रातः 11:57 से 26 अक्टूबर 2026 प्रातः 9:42 तक।
चंद्रोदय का समय रहेगा सायं काल 5:44 पर।
(चंद्रोदय का स्थानीय समय अलग-अलग राज्यों में भिन्न–भिन्न होगा।)

कोजागर लक्ष्मी-इंद्र उपवास एवं रात्रि पूजन–

25 अक्टूबर 2026, रविवार को शरद पूर्णिमा का उपवास तथा रात्रि में कोजागर लक्ष्मी-इंद्र की पूजा की जाएगी।

स्नान-दान पूर्णिमा: 26 अक्टूबर 2026, सोमवार को उदया तिथि के अनुसार स्नान और दान किया जाएगा।

विशेष योग: इस वर्ष शरद पूर्णिमा पर सर्वार्थ सिद्धि एवं बुधादित्य योग शुक्र बुध की युति से लक्ष्मी नारायण योग जैसे अत्यंत दुर्लभ योगों का संयोग बन रहा है, जो साधना और लक्ष्मी पूजन के फल को कई गुना बढ़ा देता है।

पूजन विधान एवं विशेष सिद्ध उपाय
संध्या पूजन एवं जागरण:

घर को स्वच्छ कर गंगाजल का प्रोक्षण करें। पूजा स्थल पर पीला अथवा लाल वस्त्र बिछाकर भगवान श्री हरि विष्णु, देवी महालक्ष्मी और श्री राधा-कृष्ण की प्रतिमा स्थापित करें। रोली, अक्षत, पीले पुष्प, नैवेद्य और अखंड दीप अर्पित कर सत्यनारायण कथा अथवा विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।

अचूक चंद्र एवं लक्ष्मी मंत्र:

दुर्बल चंद्रमा की शांति हेतु: ॐ चं चंद्रमस्यै नम:
अक्षय धन-समृद्धि हेतु: ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

अमृतमयी खीर का महा-उपाय–

गाय के दूध, चावल और मिश्री की खीर बनाकर शुद्ध चांदी के पात्र में रखें और रात्रि भर खुले आसमान के नीचे चंद्रकिरणों में रखें। प्रात:काल इसका प्रसाद रूप में सेवन करने से असाध्य रोगों में राहत मिलती है और शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है।

दाम्पत्य जीवन में मधुरता

पति-पत्नी साथ मिलकर रात्रि में चंद्रदेव को कच्चे दूध और जल का अर्घ्य दें। इससे वैवाहिक संबंधों में प्रगाढ़ता और स्नेह बढ़ता है।

ग्रह बाधा एवं विवाह विलंब निवारण

जिन जातकों की कुंडली में चंद्रमा राहु-केतु या शनि से पीड़ित हो, वे सफेद वस्तुओं (दूध, दही, चावल, सफेद वस्त्र) का दान करें। विवाह में आ रही रुकावटों के निवारण हेतु शरद पूर्णिमा का उपवास अत्यंत फलदायी माना गया है।

खीर धारण का वैज्ञानिक एवं औषधीय आधार

वैज्ञानिक शोध दर्शाते हैं कि शरद पूर्णिमा को चंद्रमा पृथ्वी के अत्यंत निकटतम बिंदु पर होता है, जिससे उसकी किरणों में विशेष विद्युत-चुंबकीय तरंगें और औषधीय गुण आ जाते हैं। दूध में विद्यमान लैक्टिक एसिड और चावल का स्टार्च चंद्र किरणों से उत्सर्जित पोषक तत्वों को तीव्रता से अवशोषित कर लेते हैं। जब इस खीर को चांदी के बर्तन में रखा जाता है, तो इसके एंटी-बैक्टीरियल और रोग-नाशक गुण कई गुना बढ़कर शरीर की जीवन-शक्ति को सुदृढ़ बनाते हैं।

ज्योतिषाचार्य डॉ. मंजू जोशी
वैदिक ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ
📞 8395806256