बागेश्वर / कांडा। बागेश्वर के कांडा में मंजूर हुई ₹5.41 करोड़ की पार्किंग को लेकर उत्तराखंड क्रांति दल के नेता वरुण चन्दोरा ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि “पहाड़ को कंक्रीट नहीं, बुनियादी सुविधाएं चाहिए”।
उन्होंने बताया कि कांडा जैसे छोटे पहाड़ी कस्बे में ₹5.41 करोड़ खर्च करके बड़ी पार्किंग बनाना फिजूलखर्ची है। ये पैसा सड़क, पानी, अस्पताल, स्कूल जैसी बुनियादी जरूरतों पर लगना चाहिए था। इसे वो “जनता के पैसे की बर्बादी” कह रहे हैं।
पहाड़ी इलाकों में अक्सर पार्किंग प्रोजेक्ट को लेकर बहस होती है क्योंकि जमीन कम है, लागत ज्यादा, और स्थानीय लोगों को रोजमर्रा की सुविधाओं की कमी ज्यादा खलती है। यूकेडी हमेशा से ही सरकार की फिजूल खर्ची विरूद्ध खड़ी रही है। सीए वरूण चन्दोला ने कहा कि पहाड़ पर विकास का मतलब सिर्फ कंक्रीट नहीं, बल्कि लोकल जरूरतें पूरी करना है।
वैसे देखा जाए तो ₹5.41 करोड़ कांडा जैसे पहाड़ी कस्बे में बहुत बड़ा बजट है। उत्तराखंड क्रांति दल का पॉइंट यही है कि इतने पैसे में पार्किंग से ज्यादा जरूरी काम हो सकते थे। यूकेडी नेता सीए वरूण चन्दोला ने बताया कि इतने बजट से 5-7 किलोमीटर ग्रामीण सड़क पक्की बन सकती थी। पहाड़ में 1 किलोमीटर सड़क बनाने का खर्च लगभग 70-80 लाख आता है। 10-12 पैदल पुल या रास्ते बन सकते थे जो बरसात में टूट जाते हैं। 50-60 गांवों में पाइप वाटर सप्लाई स्कीम लग सकती थी। पहाड़ में बिजली कटौती बड़ी समस्या है जिसे देखते हुए सरकार 200 से 250 घरों को सोलर लाइट एवं सोलर वाटर पंप दे सकते थे। कांडा में एक अच्छा पीएचसी और सीएचसी बन सकता था। ₹5.45 करोड़ की लागत में X-Ray और अल्ट्रासाउंड मशीन लग जाती सकती थी।10-12 बेड का वार्ड बन सकता है, 2 से 3 डॉक्टर और स्टाफ की 2 साल की सैलरी निकल सकती है या फिर 2 मोबाइल हेल्थ वैन खरीद सकते थे जो आसपास के गांवों में जाती। सरकार अगर सही में गांवों का विकास चाहती तो 5-6 सरकारी स्कूलों का पूरा रेनोवेशन और स्मार्ट क्लासरूम बन जाते।1000 बच्चों के लिए 2 साल की किताब, यूनिफॉर्म, मिड डे मील की व्यवस्था हो सकती थी।
200 से अधिक स्थानीय लोगों को स्किल ट्रेनिंग और टूल किट दे सकते थे। 50 छोटे होमस्टे को ₹1 लाख तक का सपोर्ट देकर टूरिज्म बढ़ा सकते थे।
पहाड़ में पार्किंग की असली जरूरत तभी है जब वहां टूरिस्ट/ट्रैफिक बहुत हो। कांडा छोटा कस्बा है। यूकेडी नेता वरूण चन्दोला का कहना है कि पहले लोग बीमार हों तो अस्पताल पहुंचें, बरसात में रास्ता न कटे तो रास्ता बने, बच्चों को स्कूल में सुविधा मिले तब पार्किंग बने। सरकार को चाहिए कि वह पहले ग्रामीण क्षेत्रों का रूख करें और उसके बाद ही वहां की आवश्यकताओं के अनुसार ही मूलभूत विकास कार्यों पर बल दें।





























