काशीपुर से खटीमा तक : धामी की नई सियासी चाल?
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का गदरपुर विधायक अरविंद पांडे के आवास पर अचानक पहुंचना, उत्तराखंड भाजपा के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान को उजागर कर गया है। 2027 के चुनावी साल से पहले तराई की सबसे चर्चित इस मुलाकात को सियासी गलियारों में “मनभेद मिटाओ अभियान” का नाम दिया जा रहा है। सवाल अब यही है कि क्या यह केवल एक औपचारिक भेंट थी, या काशीपुर-गदरपुर की सियासत में नई पटकथा लिखी जा रही है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि मुख्यमंत्री धामी ने तराई की जमीन को साधने के लिए यह कदम उठाया है। अरविंद पांडे, जो त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं, पिछले कुछ समय से सरकार और संगठन के कई फैसलों पर खुलकर असहमति जता रहे थे। उनके बेबाक तेवर ने पार्टी के भीतर चर्चाओं को तेज कर दिया था। ऐसे में धामी का खुद उनके घर पहुंचना, गिले-शिकवे दूर करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
भले ही इस मुलाकात को अचानक बताया जा रहा हो, लेकिन संकेत साफ हैं। चम्पावत और खटीमा में नाराजगी की चर्चा के बीच धामी की नजर अब काशीपुर सीट पर भी है। विकास के एजेंडे से ज्यादा, 2027 में सत्ता बरकरार रखने की रणनीति पर उनका जोर दिख रहा है। भाजपा के भीतर भले ही इसे समन्वय और एकजुटता की पहल कहा जा रहा हो, लेकिन इस मुलाकात के पीछे की असल कहानी वक्त आने पर ही सामने आएगी। फिलहाल इतना तय है कि धामी ने तराई के समीकरण साधने की दिशा में पहली चाल चल दी है।































